गालूडीह: रामनवमी के शुभ अवसर पर गुरुवार को गालूडीह रंकनी मंदिर परिसर में झारखंड के प्रसिद्ध लेखक सुनील कुमार दे द्वारा रचित युग पुरुष बिनय दास बाबाजी पुस्तक का विमोचन एक भव्य समारोह में किया गया. बंगला में लिखी गई यह पुस्तक महासाधक, संत और धर्म गुरु विनय दास बाबाजी की महान जीवनी और कर्मकांडो पर आधारित है. समारोह का मुख्य अतिथि के रूप में विनय दास बाबाजी व विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी उपस्थित थे. विनय दास बाबाजी ने द्वीप प्रज्वलित कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया. अनुष्ठान का मुख्य आयोजक बिद्युत पाल और चंदना पाल ने विनय दास बाबाजी, लेखक सुनील कुमार दे और कमल कांति घोष को शाल और माला देकर सम्मानित किया. स्वागत संगीत भास्कर दे और स्वागत भाषण भास्कर पात्र ने प्रस्तुत किया. उसके बाद बिनय दास बाबाजी और अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से ‘युग पुरुष बिनय दास बाबाजी पुस्तक का विमोचन किया. बाबाजी ने सभी भक्तजनों और लेखक को आशीर्वाद दिया. इस अवसर पर कुणाल षांड़गी ने कहा कि सुनील कुमार दे झारखंड का गर्व है जिन्होंने 33 पुस्तकें प्रकाशित की है. बिनय दास बाबाजी के ऊपर पुस्तक लिखकर लेखक सुनील कुमार दे ने इतिहास रच दी है. इस महान कवि और लेखक सुनील कुमार दे को राज्य स्तर से ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर से भी सम्मान मिलना चाहिए. वहीं, अनुष्ठान का कुशल संचालन माताजी आश्रम का सचिव राजकुमार साहू ने किया. (नीचे भी पढ़े)

मौके पर पूर्व जिला परिषद करुणामय मंडल, कापड़ गादी विकास रंकणी मंदिर के दिनेश सरदार, मूर्तिकार सुबोध गोराई, बंग उत्सव समिति के सचिव राजेश राय, समाज सेवी चित्तरंजन दास, समाजसेवी कृष्ण गोप, शिक्षाविद जय हरि मुंडा, माताजी आश्रम के अध्यक्ष कृष्ण पद मंडल, ट्रस्टी हीरालाल दे, कोषाध्यक्ष विश्वामित्र खंडायत, भक्त शिल्पी कमल कांति घोष, सुंडी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सनत मंडल, डॉक्टर प्रताप माझी, करुणामय मंडल, सुबोध गोराई, विश्वामित्र खंडायत, जय हरि सिंह मुंडा, राजेश रॉय, दिनेश सरदार, तपन मंडल, महितोष मंडल,सहदेब मंडल,सुबोध मंडल,कृष्ण पद मंडल,हेम चंद्र पात्र, डॉक्टर बिकाश चंद्र भकत,तपन मंडल,तपन कुमार मंडल,बलराम गोप,महितोष गोप,स्वपन मंडल,अजित सरदार,मोनी पाल, भास्कर दे,तोड़ित मंडल,लोचना मंडल,झरना साहू,बीथिका मंडल,शलमा हांसदा,सुजाता मोरोल,बन्दना मंडल,बेबी मंडल,बुलु मंडल,संतोष मंडल,बेला रानी मंडल,अंजलि मंडल,बिद्युत पाल, चंदना पाल, भवानी घोष,सनातन शीत, अशोक कुमार नायक,भास्कर नायक,संजय साहू,मृणाल पाल, भानु राणा,शक्ति रजक,अरुण महतो,अमल बिस्वास,सुखदेव दास,रामु साहू आदि ने भी अपना अपना महत्वपूर्ण विचार रखे और इस पुस्तक की रचना के लिए लेखक की भूरी भूरी प्रशंसा.



