जमशेदपुर : जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिवमंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन, मंगलवार को आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने ध्रुव चरित एवं नृसिंह अवतार प्रसंग के साथ कथा की शुरुआत की. कल की कथा के प्रसंग, सुखदेव परीक्षित एवं विदुर चरित की जानकारी देते हुए आचार्य त्रिपाठी ने अयोध्या के महाराजा खट्वांग के दो घड़ी में मोक्ष-प्राप्ति की कथा सुनाई. उन्होंने कहा कि सात दिन के कथा श्रवण से जीवन सफल हो जाता है. पूजा करते हुए अपने आसन को पहले साधिए. उन्होंने कहा कि अपनी इंद्रियों पर काबू पाना अत्यंत आवश्यक है.उन्होंने बताया कि अच्छी संगत से ही कल्याण होगा, अच्छी संगत से ही मनुष्य विवेकी बनता है. कलियुग में मनुष्य की सही आयु क्या होती है, उन्होंने इसकी भी विस्तार से जानकार दी. (नीचे भी पढ़ें)

आचार्य श्री विनय कांत त्रिपाठी ने कहा कि समस्त कामनाओं की सिद्धि के लिए पितृ-भक्ति करनी चाहिए, जिसकी तृष्णा समाप्त नहीं होती है, वह जंगली सुअर की तरह ही होता है. जिसने जीवन में विनम्रता के साथ झुकना सीख लिया है वही सच्चा मानव कहलाने का पात्र है. उन्होंने कहा कि जीवन में माता-पिता का स्थान, माता-पिता की भक्ति को भगवान् की पूजा बताया. उन्होंने कहा कि माता-पिता का आत्मा से दिया आशीर्वाद ही सबसे बड़ा आशीर्वाद होता है. आज खचाखच भरे प्रेक्षागृह में हिरण्यकशिपु, भक्त प्रह्लाद एवं भगवान नृसिंह की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई. कथा महोत्सव को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में सांवर लाल शर्मा, पवन काबरा, विश्वनाथ शर्मा, पवन सिंगोदिया, कमल किशोर अग्रवाल, प्रमोद सराय वाला आदि सक्रिय रहे. आज की कथा में पवन नरेडी, श्याम सुंदर रिंगसिया, रतन अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल, कैलाश शर्मा, शारदा अग्रवाल, गणेश दायमा, किरण भाउका, महावीर चोबे, मुरलीधर शर्मा, नथमल शर्मा, गिरधारी शर्मा आदि उपस्थित रहे.







