जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाने के लिए अपना जीवन खपा दिया. वह सिद्धांतों पर चलने वाले थे. वह मुसलमानों के विरोधी नहीं थे. उन्होंने यह भी कहा कि आज जो भी कार्यकर्ता किसी भी दल से जुड़ा हुआ क्यों न हो, उसे भारत की राजनीति के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। तभी वह प्रबुद्ध कार्यकर्ता बन सकेगा. अपने बिष्टुपुर स्थित आवास पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सरयू राय ने कहा कि डॉ. मुखर्जी कभी भी मुसलमानों के खिलाफ नहीं थे. वह देशहित की सोचते थे. मुखर्जी मेधावी और हठी थे. अपनी बातों, नीतियों, विचारधारा पर अडिग रहते थे. वह जीवनपर्यंत अलग ही धारा पर चलते रहे, लेकिन देशहित में जब भी दूसरे विचारधारा के साथ काम करने का मौका मिला, उन्होंने किया क्योंकि उनके लिए देश पहले था इसलिए हमें सभी दलों की विचारधाराओं को पढ़ना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)

सरयू राय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज जो भी लोग राजनीति में हैं, उन्हें 1947 से अब तक की राजनीतिक घटनाक्रमों और तथ्यों के बारे में जानकारी होनी चाहिए. खासकर जो लोग जनता दल यूनाइटेड से जुड़े हैं, उन्हें इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए. उन्हें इसका अध्ययन करना चाहिए. विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बारे में भी उन्हें पढ़ना चाहिए. बेशक वह किसी खास विचारधारा को मानें लेकिन राजनीति में हैं तो सभी राजनीतिक विचारधाराओं के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए. उन्हें इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि देश में क्या चल रहा है, कहां क्या हो रहा है. तमिलनाडु में बार-बार कैसी सरकार बन रही है, यह उस जिज्ञासु कार्यकर्ता के मन में आ सकता है, जो देशहित के बारे में सोचता है और जो भारतीय राजनीति को समग्रता में देखते हुए चलता है. श्री राय ने कहा कि आज का दौर सामासिक राजनीति का दौर है. इस दौर में आपको सभी को साथ में लेकर चलना होगा. (नीचे भी पढ़ें)
आप अपनी विचारधारा और अपने सिद्धांतों पर एकदम अड़े रहेंगे तो अकेले पड़ जाएंगे. यह दौर विविध राजनीतिक विचारधाराओं को समझने-बूझने और अंगीकार करने का है. अब के दौर में विशुद्ध रुप से राजनीति और सिद्धांत की बात करके राजनीति करना दुष्कर कार्य है इसलिए जो व्यावहारिक चीज है, उसे समझने और आत्मसात करने की जरूरत है. इसके पूर्व जदयू के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की आत्मा हैं. वह नेहरू मंत्रिमंडल में मंत्री थे. लेकिन, जब उन्होंने देखा कि नेहरु-लियाकत पैक्ट का सरेआम उल्लंघन हो रहा है तो एक झटके में मंत्री पद को लात मार दिया. उनका नारा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे बेहद प्रभावी रहा. उनके नारे को भारत में प्रभावी रुप से लागू किया गया. आज आप जम्मू-कश्मीर में भी तिरंगा देखेंगे, वहां भी भारतीय संविधान के अनुरुप काम हो रहा है और जैसे अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री होते हैं, वैसे ही जम्मू-कश्मीर में भी मुख्यमंत्री हैं. कार्यक्रम में प्रवीण सिंह, चुन्नू भूमिज और उषा यादव ने भी अपने विचार रखे. मंच संचालन कुलविंदर सिंह पन्नू ने जबकि आभार प्रदर्शन विकास साहनी ने किया.







