
जमशेदपुर : जमशेदपुर में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है. आपको बता दें कि सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरमुख सिंह मुखे पर झारखंड सिख प्रतिनिधि बोर्ड के चेयरमैन गुरुचरण सिंह बिल्ला पर जानलेवा हमला कराने का आरोप साबित होने के बाद उन्हें जेल हुआ था, जिसके बाद सरदार महेंद्र सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद 5 सदस्यीय कमेटी ने सरदार महेंद्र सिंह को हटाकर रविवार को गुरमुख सिंह मुखे को फिर से अध्यक्ष बना दिया और बकायदा उनको वापसह से प्रभार सौंप दिया. इसको लेकर सिख संगत ने पुरजोर विरोध करते हुए जब तक पूरे मामले में गुरमुख सिंह मुखे पाक साफ होकर बाहर नहीं आ जाते तब तक उन्हें अध्यक्ष के पद पर नहीं रहने की बात कही. संगत ने सरदार महेंद्र सिंह को पद से हटाए जाने का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने बताया कि कोई भी कमेटी कानून से चलती है. जबरन कानून का उल्लंघन कर कोई व्यक्ति प्रतिष्ठित पद पर नहीं बैठ सकता है. वैसे गुरमुख सिंह मुखे को लेकर सिख समुदाय दो खेमों में बंट गया है. जो आने वाले दिनों में विवाद का बड़ा कारण हो सकता है. कुल मिलाकर सीजीपीसी प्रधान का पद एक बार फिर से विवादों में घिर गया है. (नीचे पूरी खबर पढ़ें)

उधर इस पूरे मामले पर सीजीपीए के प्रधान गुरुमुख सिंह मुखे ने गुरचरण सिंह बिल्ला पर साजिश के तहत उन्हें फंसाने का आरोप लगाते हुए साफ कर दिया है कि वे सीजीपीसी के इलेक्टेड (चुनाव में जीतने के बाद) प्रधान है. उनकी प्रधान बनने को चुनौती देने के बजाय वे न्यायालय में सबूत के साथ जाएं और उन्हें सजा दिलाएं. उन्होंने गुरचरण सिंह बिल्ला पर चुनाव के दौरान भी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया. साथ ही गुरचरण सिंह बिल्ला को आतंकवादी बताया और कहा कि बेअंत सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी गुरचरण सिंह बिल्ला है और जमशेदपुर पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर वह अवैध हथियार लेकर घुम रहा है. उन्होंने पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग जिला प्रशासन से की है. साथ ही अपनी प्रधान पद पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं बताते हुए खुद को सीजीपीसी का प्रधान बताया. उन्होंने जमशेदपुर के एसएसपी डॉ एम तमिल वाणन से मुलाकात की है और सारी परिस्थितियों की जानकारी दी है.












