
जमशेदपुरः एक समय था जब सरायकेला खरसांवा जिले के कुकडू ब्लॉक के लोग पीने के स्वच्छ पानी को तरसते थे, साल में 10 महीने ही पीने योग्य पानी रहता था. गांव के लोग इसलिए भी परेशान थे कि लगातार भूजल स्तर में भी कमी देखी जा रही थी वहीं बारिश का पानी ठहरने की बजाय नदी में चला जाता था. इसको देखते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन ने वाटरशेड मैनेजमेंट की शुरुआत की और आज इसका लाभ आस-पास के 15 गांव के 25 हजार लोग ले रहे है. यही नहीं, इस प्रोजेक्ट से मृदा संरक्षण को भी काफी बढ़ावा मिला है.(नीचे भी पढे)
जहां बारिश से पहाड़ों की मिट्टी बहते हुए नीचे आ जाती थी और पहाड़ी जमीन बंजर हो गए थे वहीं आज इस प्रोजेक्ट से पहाड़ भी हरे भरे हो रहे है जिससे इलाके में पेड़ पौधे भी बढ़ रहे है. टाटा स्टील फाउंडेशन ने इसकी शुरुआत सरायकेला के कुकड़ू ब्लॉक से की थी और आज बोड़ाम में भी इसी शुरु किया गया है वहीं पोटका ब्लॉक में भी इसकी शुरुआत की जानी है.

क्या है टाटा स्टील फाउंडेशन का वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट
वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2016 में की गई थी. टाटा स्टील फाउंडेशन ने जिले के स्थानीय समुदाय के सहयोग से विस्तृत आधारभूत सर्वेक्षण किया और व्यवस्थित रूप से डाटा एकत्र किया, जिसके बाद पिछले दशक में ग्रामस्तर पर वाटरशेड कमिटियों का गठन किया गया. समुदाय ने विभिन्न प्रकार की मैपिंग, जैसे -संसाधनों, भूमि उपयोग, हस्तक्षेप मानचित्रों और परिवार-आधारित योजनाओं में महिलाओं को सक्रिय रूप से शामिल किया. तब भूजल स्तर 8.5 मीटर तक था. स्थानीय लोगों ने पहाड़ों पर वाटर पिट तैयार किया. एक पिट में बारिश के दौरान लगभग तीन हजार लीटर पानी जमा होता था. .(नीचे भी पढे)
प्रोजेक्ट के दौरान 16 मिलियन क्यूबिक फीट से अधिक पानी का रिचार्ज किया है. आज भूजल स्तर बढ़कर 3.5 मीटर हो चुका है. यह प्रोजेक्ट मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र और इसकी सेवाओं के संरक्षण पर 15.1 के एसडीजी लक्ष्य को पूरा करने का भी प्रयास करता है. प्रोजेक्ट के तहत किये गये प्रयासों ने भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद की, जिससे पेयजल, घरेलू उपयोग और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुलभ हुई. इसके अलावा, नियोजन के लिए आवश्यक श्रम बल में वृद्धि के परिणाम स्वरूप स्थानीय लोगों को प्रबंधकीय और प्रशासकीय, दोनों स्तरों पर रोजगार प्रदान किया गया. टाटा स्टील फाउंडेशन ने झारखंड स्टेट वाटरशेड मिशन और डिस्ट्रिक्ट वाटरशेड डेवलपमेंट सेल के सहयोग से ग्रामीण समुदाय को लक्ष्य कर क्षेत्र-आधारित अप्रोच के साथ काम किया, जिसमें मुख्यतः सरायकेला-खरसांवा जिला के कुकड़ू प्रखंड में वाटरशेड एरिया के तहत 15 गावों में रहने वाले सीमांत किसान शामिल थे. .(नीचे भी पढे)
हस्तक्षेप की प्रक्रिया में, यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया गया था कि समुदाय की ओर से प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित विभिन्न समूहों, जैसे-एसएचजी (स्वयं सहायता समूह), यूजी (उपयोगकर्ता समूह) और एफजी (किसान समूह) की मदद ली गई. परिणाम स्वरूप किसानों के दृष्टिकोण में बदलाव आया खेती के प्रति अधिक सुखद और आत्मविश्वास दृष्टिकोण भी आया. इस प्रोजेक्ट ने ग्रामीणों के लिए नयी नौकरियों के सृजन को भी बढ़ावा दिया, जिससे समुदाय में लोगों की समग्र स्थिति में सुधार हुआ. हस्तक्षेप के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाया गया दृष्टिकोण इस वाटरशेड मैनेजमेंट का विकास कई चरणों के माध्यम से हुआ है.




