जमशेदपुर : जनवादी लेखक संघ की सिंहभूम इकाई की ओर से शनिवार शाम साकची पुराना कोर्ट परिसर में वासंती काव्य संध्या का आयोजन किया गया. मंच पर शैलेन्द्र अस्थाना, राजदेव सिन्हा, सुरेश दत्त पाण्डेय, डॉ उदय प्रताप हृयात आदि मंचस्थ रहे. कार्यक्रम की संयोजिका डॉ लता मानकर ने शब्द सुमनों से अतिथियों एवं कवियों का स्वागत किया. कवि गोष्ठी की शुरुआत अनमोल की कविता “हमारा प्यारा नया भारत ” से हुई. तदुपरांत अनुभव सिंह, आशुतोष चौबे, आलोक तिवारी, पंकज प्रभात, सुजल, नम्रिता जैसे युवा कवियों ने अपनी रचनाओं में वासंतिक तरंगों के साथ-साथ वैश्विक संकट, युद्ध की विभीषिका, बेरोजगारी, धार्मिक उन्माद, कट्टरवाद और खत्म होती संबंधों की संवेदना को उकेरते हुए सवाल किया कि क्या वास्तव में विश्व 21वीं सदी का है, मनुष्यता का पक्षधर है? (नीचे भी पढ़ें)

युवा शायर संजय सोलोमन ने अपने शेर, जैसे सहरा में वसंत का आना क्या चले जाना क्या/बस वैसे ही बेमानी है मेरा यौवन तेरे बिन” से खूब तालियां बटोरीं. मायानगरी मुंबई में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके युवा शायर विश्वदीप जीस्त ने अपने शेर, – ‘आओ मजहब-मजहब खेलें और हराएं इंन्सां को/फिरके-खेमे-जात बनाएं और मिटाएं इंन्सां को” से महफिल में नई जान फूंक दी. (नीचे भी पढ़ें)

शेरो-शायरी, नज्म, गीत, गजल व कविताओं के इस दौर में सबीर नवादवी, असर भागलपुरी, डॉ उदय प्रताप हयात, विमल किशोर विमल, वीणा कुमारी, सरिता सिंह, सतीश कुमार, कैलाशनाथ शर्मा गाजीपुरी, रमेश हंसमुख, जयप्रकाश पाण्डेय, प्रियंका सिंह, रीना सिन्हा सलोनी, सुनीता सोहनी, अजय मुस्कान, श्रवण, वरुण प्रभात आदि ने अपनी रचनाओं से कई बुनियादी सवालों को आवाज दी. कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्योत्सना अस्थाना ने की तथा संचालन लता मानकर ने किया. धन्यवाद ज्ञापन वरुण प्रभात ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में एसपी सिंह, अर्पिता, जेजे प्रसाद, सीता सिंह, धीरेन्द्र प्रसाद सिंह आदि का विशेष योगदान रहा.







