
रांची/जमशेदपुर : पूरे झारखंड में शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी गयी है. कुछ शर्तों के साथ और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये ऑनलाइन के अलावा दुकानों से भी लोग शराब ले सकते है. 20 मई से इसकी शुरुआत की जायेगी. सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक शराब की बिक्री होगी. इस दौरान पूरे राज्य को तीन जोन में बांटा गया है, जिसके तहत शहरी इलाके में लोग जोमैटो, स्वीगी जैसे ऑनलाइन बिक्री करने वाली एजेंसियों के माध्यम से लोग शराब ले सकते है जबकि शराब की बिक्री को लेकर सभी दुकानदारों को सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करना होगा. इसके तहत लोग ऑनलाइन भी होम डिलीवरी शराब मंगा सकते है जबकि कई जगह पर लोग इ-टोकन सिस्टम भी ले सकते है, जिसके जरिये लोग अपना समय निर्धारित कर ऑनलाइन कूपन लेकर दुकान पर जायेंगे और उनको बिना लाइन लगे ही शराब मिल जायेगी. वैसे गांव में सिर्फ दुकान से ही शराब मिलेगी. शराब की कीमत में करीब 25 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो चुकी है. इसके तहत अब तक शराब पर 50 फीसदी ही वैट था, जिसको बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया गया है जबकि अलग से स्पेशल एक्साइज ड्यूटी लगाया गया है, जो पूरे शराब की कीमत का 10 फीसदी होगा. इस तरह करीब 25 फीसदी ज्यादा कीमत पर लोगों को शराब मंगलवार यानी 20 मई से मिला करेगी. सभी दुकानों के बाहर 6 फीट की दूरी एक व्यक्ति से दूसरे के बीच रहनी चाहिेए. जमशेदपुर में होम डिलीवरी की शराब मिलेगी और लोग दुकानों से भी शराब ले सकते है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हरी झंडी के बाद दुकानों को खोलने को लेकर आदेश निर्गत किया जायेगा जबकि नया रेट भी जारी किया जायेगा. शराब दुकानों से बिक्री के दौरान इस बात का ख्याल रखा जाना होगा कि किसी भी हाल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो और दुकानें किसी भी हाल में सुबह सात बजे से लेकर शाम सात बजे तक ही खुलेगी. दूसरी ओर, जमशेदपुर के कदमा में दुकानदारों ने पुलिस के सामने ही जमकर हंगामा किया.
इन दुकानदारों ने पहले दुकानें खोल दी थी, जिसको पुलिस ने आकर बंद करा दिया. दुकानदारों ने दुकानों को बंद कर तो दिया, लेकिन पुलिस के सामने ही अपना विरोध दर्ज करा दिया. इन लोगों ने साफ कर दिया है कि अगर शराब दुकानें खुलेगी तो पूरा बाजार खोला जायेगा.
वे लोग इसके लिए किसी भी हद तक जायेंगे. कपड़ों की दुकानें नहीं खुलेगी, कई सारी दुकानें नहीं खुलेगी, लेकिन शराब की दुकानें अगर खोली जायेगी तो इसका विरोध होगा क्योंकि शराब की दुकानों से अराजकता फैलना है जबकि कपड़ों की दुकानें दो माह से बंद है और अब यह लोगों की जरूरत की चीज भी बन चुकी है.














