रांची/जमशेदपुर/बोकारो/चंदवा : झारखंड में तीन ऐसी घटनाएं घटी है, जिससे यह खुलासा हो रहा है कि किस तरह लोगों की जान के साथ स्वास्थ्य विभाग के लोग खिलवाड़ कर रहे है. लोगों की जान की कोई मोल झारखंड में नहीं बची है. करोड़ों-अरबो रुपये खर्च करने के बावजूद लापरवाही और मिस-मैनेजमेंट (खराब प्रबंधन व्यवस्था) के कारण लोगों की जान चली जा रही है या लोगों की जान संकट में आ रही है. ऐसे तीन केस शुक्रवार को देखने को मिले.

केस -1
बोकारो के सदर अस्पताल में गर्भवती महिला अपना इलाज कराने आयी थी. उसको पहले कोविड टेस्ट कराया गया. कोविड टेस्ट के दौरान ही जैसे ही महिला के गले से स्वैब निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही घटिया टेस्टिंग किट का एक हिस्सा ही टूट गया और टेस्टिंग किट ही महिला के गले में फंस गया. इस घटना के बाद सदर अस्पताल में अफरा-तफरी मच गयी. सूचना मिलते ही सारे डॉक्टर वहां पहुंचे, जिसके बाद उक्त महिला को तत्काल पीएमसीएच धनबाद भेज दिया गया, जहां, उसकी हालत गंभीर है और उसके गले से टेस्टिंग किट को निकालने की कोशिश तेज कर दी गयी है.

केस- 2
शुक्रवार को जमशेदपुर के ब्रम्हानंद अस्पताल में कोरोना टेस्ट के इंतजार में ही पूर्व सैनिक की पत्नी की मौत हो गयी. पूर्व सैनिक मानगो निवासी अवधेश कुमार की पत्नी और जमशेदपुर के डीसी ऑफिस में कार्यरत कर्मचारी अनिता सिन्हा की ब्रम्हानंद अस्पताल के द्वार पर ही मौत हो गयी. कोरोना टेस्ट के नाम पर अस्पताल ने फर्स्ट एड भी नहीं दिया जिससे उनकी सांस रुक गयी. द्वार पर पीपीई किट पहने स्टाफ सभी अंदर गए लेकिन ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर नहीं आये. इसी दौरान उनकी मौत हो गयी. सूचना मिलते ही पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर के 50 कार्यकर्ता अस्पताल पहुंच गए और अपना आक्रोश व्यक्त किया. इसको लेकर पूर्व सैनिकों ने शिकायत की है. दूसरी ओर, उक्त महिला की मौत के बाद जमशेदपुर के डीसी ऑफिस में शोक का माहौल है और दिवंगत कर्मचारी को वहां श्रद्धांजलि भी अर्पित किया गया.
केस-3
सात सितंबर को चंदवा सीएचसी में एंबुलेंस खड़ी रहने और घायल मरीज को पैदल अस्पताल पहुंचाने पर हुई मौत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान ले लिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर लातेहार सिविल सर्जन संतोष कुमार श्रीवास्तव द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम शुक्रवार को जांच करने चंदवा पहुंची. जांच टीम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह, जिला मलेरिया ऑफिसर अशोक ओड़िया व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ शोभना टोप्पो शामिल थे. जांच के दौरान टीम ने सीएचसी प्रभारी को निर्देश दिया कि ससमय सभी जरूरतमंदों को एंबुलेंस मिले, इसको लेकर जवाबदेही तय की जाए. आपको बता दें कि चंदवा सीएचसी में एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक मरीज की मौत हो गयी थी.







