रांची : झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों को पेंडिंग रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इस तरह के मसले को ”परेशान करने वाला” करार दिया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में झारखंड हाईकोर्ट के पेंडिंग एक मामले को लेकर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी की. खंडपीठ ने कहा है कि वह इस मुद्दे को लेकर कुछ अनिवार्य गाइडलाइन बनायेगी. कहा कि केस को पेंडिंग रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आश्चर्य जताया कि झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद 67 आपराधिक मामलों के अपीलों पर फैसला अब तक नहीं सुनाया है. इस मसले पर सुनवाई के दौारन सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने देश भर के सारे हाईकोर्ट से चार सप्ताह में पेंडिंग मामलों पर रिपोर्ट मांगी है, जिनमें 31 जनवरी 2025 को या उससे पहले सुरक्षित फैसले रखे गये है, लेकिन आज तक फैसला नहीं सुनाया गया है. सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जेनरल की ओर से दायर रिपोर्ट पर गौर करने के बाद यह आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 तक खंडपीठ द्वारा सुनी गयी 56 आपराधिक अपील के मामलों में आदेश सुरक्षित रखे जाने के बावजूद फैसला नहीं सुनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट के आधार पर बताया कि एकल पीठ के जज के समक्ष आदेश सुरक्षित रखे जाने के बावजूद 11 आपराधिक मामलों पर फैसला नहीं सुनाया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
सर्वोच्च न्यायालय आजीवन कारावास की सजा पाने वाले चार दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कार्रवाई की है और अपनी टिप्पणी करते हुए दिशा निर्देश दिये है. याचिका में दावा किया गया था कि झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 मे दोष साबित होने के खिलाफ उनकी अपील पर आदेश सुरक्षित रखा गया था, लेकिन फैसला नहीं सुनाया गया, जिसकी वजह से वे सजा में छूट का लाभ लेने में सक्षम नहीं थे. इस केस में पैरवी अधिवक्ता फौजिया शकील कर रही है.











