
रांची/जमशेदपुर : भू-माफिया-अधिकारियों, कर्मियों के गठजोड़ से सरकारी भूमि के कागजातों में हेराफेरी कर जमीन पर कब्जा जमाने पर अब लगाम लगेगी. सरकार ने सरकारी भूमि के संरक्षण के लिए एसओपी (कार्य योजना) तैयार करने का फैसला लिया है. मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने इस संबंध में राजस्व एवं निबंधन भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया है. भूमि से संबंधित सारे दस्तावेजों की हेराफेरी पर लगाम करने के लिए सभी कागजातों को डिजिटलाइज भी किया जायेगा. भूमि से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए अभिलेखागार के कार्यकलाप और व्यवस्था को सुढ़ृढ़ किया जायेगा ताकि दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से रखा जा सके. मुख्य सचिव के निर्देश के अनुपालन के बाद राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने सभी उपायुक्तों, बदोबस्त पदाधिकारियों को पत्र लिखा है और सरकारी भूमि संरक्षण के लिए उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. सभी उपायुक्तों को कहा गया है कि वे अपने जिला अंतर्गत सभी प्रकार की सरकारी भूमि के अतिक्रमण, दुरूपयोग, खरीद-फरोख्त आदि से संबंधित जो आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनकी समेकित विवरणी पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध करायें. इसकी एक प्रति विभाग को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों को व्यक्तिगत दायित्व दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रधिकार अंतर्गत पड़ने वाली प्रतिबंधित भूमि की विवरणी संबंधित डीसी से प्राप्त करेंगे एवं सर्वे सेटलमेंट के मामलों में सुनवाई के दौरान संबंधित सरकारी कार्यालय, अधिकारियों को समुचित अवसर देते हुए आदेश पारित करेंगे. सचिव ने सारी कार्यवाही एक माह के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार के सभी विभागों, निकायों द्वारा अपने स्वामित्व की भूमि, अजिर्त रैयती भूमि एवं हस्तांतरित सरकारी भूमि पर भूमि की सुरक्षा के लिए बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें भूमि का पूर्ण विवरण होगा तथा यह उल्लेख होगा कि भूमि पर किसी तरह का अनाधिकृत प्रवेश, उपयोग एवं निर्माण प्रतिबंधित है. इसका उल्लंघन करने पर कानून सम्मत दंडनीय कार्रवाई की जायेगी.
सभी प्रतिबंधित जमीन की सूची के अंतर्गत आने वाली सरकारी भूमि, खासमहल की भूमि, लीज बंदोबस्ती की गयी भूमि, विभिन्न विभागों के लिए अजिर्त की गयी रैयती भूमि एवं हस्तांतरित सरकारी भूमि, वन को एनजीडीआरएस वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. वन पदाधिकारी के हस्तक्षर से अपलोड किया जायेगा. रजिस्टर-टू में इसे अंकित किया जायेगा. प्रतिबंधित सूची की भूमि की विवरणी सभी निबंधन कार्यालय, राजस्व कार्यालय और अभिलेखागार में उपलब्ध कराया जायेगा ताकि जमीन की हेराफेरी न हो सके.














