
रांची : झारखंड की राजधानी रांची के दशम फॉल में नक्सलियों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में मरने वाले पुलिस जवानों की संख्या दो हो गयी है. पहले रांची के सोनाहातू थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव निवासी खंजन कुमार महतो की मौत हुई थी. बाद में मेडिका अस्पताल में इलाज के दौरान पलामू के लेसलीगंज के रहने वाले आरक्षी अखिलेश राम की मौत हो गयी. अखिलेश राम को छह गोलियां लगी थी जबकि खंजन महतो को तीन गोलियां लगी थी. रांची और खूंटी जिला के सीमा में पड़ने वाले डाकापीढ़ी जंगल और आसपास में नक्सलियों के होने की सूचना पाकर पुलिस वहां पहुंची थी, लेकिन चूंकि, पुलिस की संख्या काफी कम थी, इस कारण नक्सली भारी पड़ गये और दो जवान शहीद हो गये. इस घटना के बाद पुलिस ने अपना ऑपरेशन कांबिंग शुरू कर दी है. नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए पुलिस की पूरी टीम जंगलों की खाक छान रही है. दूसरी ओर, पुलिस को सूचना मिली है कि इस घटना के पीछे बोयदा पाहन के गिरोह का हाथ है जबकि इस गिरोह के साथ महाराजा प्रमाणिक गिरोह के नक्सली का भी हाथ है. बताया जाता है कि नक्सली महाराजा प्रमाणिक और बोयदा पाहन एक साथ मिलकर इस तरह की घटना को झारखंड में अंजाम दिला रहे है. यह नक्सली समूह ही सरायकेला से लेकर चाईबासा तक में सक्रिय रहकर नक्सली वारदात को अंजाम दे रहा है. दूसरी ओर, इस घटना के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नक्सलियों को फिर से चेतावनी दी है और घटना पर अफसोस जताया है. श्री दास ने कहा है कि दो जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, उनकी शहादत को सलाम. सरकार हर पल शहीदों के परिजनों के साथ खड़ी है. उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है और हम इसे खत्म करके ही दम लेंगे. गौरतलब है कि गुमला में नक्सलियों को गुरुवार को ही मुख्यमंत्री ने मांद में घुसकर मारने की चेतावनी दी थी और दूसरे दिन ही नक्सलियों ने पुलिस के जवानों को ही मौत के घाट उतार दिया.



