देवघर : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट हॉस्पिटल (पी. डी. हिंदुजा अस्पताल), देवघर में आयोजित “सैन्य संपर्क मेला” को संबोधित करते हुए कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण पूरे समाज की जिम्मेदारी है. हमारे सैनिक देश की सीमाओं पर तैनात रहकर भारत की संप्रभुता, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा करते हैं. उनके प्रति सम्मान केवल भावना नहीं, बल्कि हमारा राष्ट्रीय दायित्व है. राज्यपाल ने बाबा बैद्यनाथ की पावन धरती पर उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि झारखण्ड के राज्यपाल के रूप में उनका इस राज्य से विशेष आत्मीय जुड़ाव रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं है, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है”, का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा में सैनिकों का साहस, अनुशासन और त्याग अतुलनीय है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इस अभियान के दौरान साहस, शौर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. यह राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है. उन्होंने कहा कि भारत शांति और सह-अस्तित्व में विश्वास करता है, लेकिन देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता. (नीचे भी पढ़ें)
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है. “सैन्य संपर्क मेला” जैसे आयोजन सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिजनों से सीधे संवाद करने, उनकी आवश्यकताओं को समझने तथा उन्हें उपलब्ध कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने स्थानीय सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट हॉस्पिटल तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
राज्यपाल ने युवाओं से सैनिकों के अनुशासन, साहस, संयम और राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने तथा इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि देश के लिए योगदान देने का अवसर प्रत्येक व्यक्ति के पास है और इसके लिए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी एवं निष्ठा से निर्वहन करना आवश्यक है. सैनिकों के प्रति सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार और कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए। राष्ट्र की रक्षा करने वालों की सेवा करना भी राष्ट्रसेवा का ही एक रूप है.




