
सरायकेला : सरायकेला- खरसावां जिला के कांड्रा थाना अंतर्गत मुख्य सड़क के किनारे 35 वर्षीय व्यक्ति का शव पेड़ से लटका पाया गया. उधर पेड़ में शव लटके होने की सूचना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. वहीं घटना की सूचना मिलते ही कांड्रा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मृतक का नाम मणीन्द्र नाथ मंडल बताया जाता है. हालांकि यह हत्या है या आत्महत्या इसकी तफ्तीश जारी है. बताया जाता है कि मृतक अपने मामा के घर में रहता था और दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था.

सरायकेला-खरसावां जिले के सब्जी बाजार से गायब हो रहे दुकानदार
वैश्विक संकट को लेकर सरायकेला खरसावां जिला प्रशासन ने जिले के सब्जी बाजारों को व्यवस्थित करते हुए अलग-अलग जगहों को चिन्हित कर उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बाजार लगाने की अनुमति दी थी. इसी क्रम में आदित्यपुर के जयप्रकाश उद्यान में भी सब्जी मंडी को शिफ्ट किया गया था, लेकिन जैसे- जैसे लॉकडाउन की मियाद बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे जिला प्रशासन द्वारा लगवाए गए सब्जी मंडियों के दुकानदार अब गली मुहल्लों में अपनी दुकानें लगा रहे हैं. इससे अस्थायी रूप से लगने वाले बाजार में ग्राहकों के साथ दुकानदारों की भी संख्या कम होती जा रही है. इधर नियमित रूप से बदले हुए स्थल पर अस्थाई तौर पर दुकान लगाए जा रहे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आन पड़ी है.

दुकानदारों का कहना है दिन के वक्त प्रशासनिक अनुमति के तहत 12 बजे तक ही वे यहां दुकान लगा पाते हैं. साथ ही यहां कई पाबंदियां भी लगी हुई है. जैसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, सब्जियों को ग्राहकों को सीधे छूने नहीं देना, एक दुकान में 2 से ज्यादा ग्राहकों को खड़ा होने नहीं देना, वगैरह. वहीं दोपहर बाद शाम को दूसरे सब्जी विक्रेता गलियों मोहल्लों में दुकान लगाकर खुलेआम सब्जियों की बिक्री कर रहे हैं. जिससे ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच रहे हैं. वही इस संबंध में बाजार मास्टर मनोज पासवान ने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन से जो निर्देश दिया गया है हम उसका पालन करा रहे हैं. जैसे ही जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आदेश आएगा, हम उस पर विचार करेंगे. फिलहाल उन्होंने सब्जी विक्रेताओं को सख्त हिदायत देते हुए जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया है. वैसे जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाने की जरूरत है. क्योंकि अस्थाई तौर पर चिन्हित किए गए मंडी में अगर ग्राहक नहीं आते हैं और दुकानदार गलियों मुहल्लों में जाकर दुकान लगाकर अपने सामान बेचते हैं तो फिर नियमित बाजार का कोई औचित्य नहीं रह जाता है. फिर वहां इस बात की क्या गारंटी है कि सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन किया जा रहा है. साथ ही ग्राहकों को सब्जियां छूने दिया जा रहा है या नहीं.















