
जमशेदपुर : आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा को लेकर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू अकादमी लगातार कई कार्यक्रम चला रहे हैं. सोहराय आदिवासियों का एक बड़ा पर्व है. इसे कैसे मनाया जाए, क्या-क्या विधियां हैं, और सोहराय में किन-किन गीतों का प्रयोग होता है इसको लेकर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू अकादमी की ओर से एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया. जिसमें न केवल झारखंड बल्कि बंगाल और ओडिशा के भी विद्वानों ने हिस्सा लिया. झाड़ग्राम से आए प्रोफेसर रामो टुडू ने सोहराय के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला.



