
रांची : देश के स्टील प्लांटों और सेल के माइंस मे काम करने वाले मजदूरों द्वारा 16 दिसंबर को एक दिवसीय हड़ताल की जा रही है. झारखंड मे भी बोकारो इस्पात संयत्र, सेल के लौह अयस्क और कोयला खदानों मे हड़ताल की तैयारी जारी है. यह हड़ताल इस्पात उधोग मे घोषित मजदूर हित विरोधी समझौता रद्द करने, सेल और आरआइएनएल की विनिवेश या निजीकरण की साजिश बंद करने, स्टील इंडस्ट्री के स्थाई मजदूरों के लिए 15 प्रतिशत एमजीबी, 28 प्रतिशत पर्क्स और 9 प्रतिशत की दर से पेंशन का भूगतान सुनिश्चित करने, मजदूरों की ग्रेच्युटी कैपिंग और पेंशन की राशि न्यु पेंशन स्कीम मे निवेश किए जाने के खिलाफ और जनवरी 2017 से से बकाया एरियर व वार्षिक 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट के भूगतान की गारंटी किए जाने तथा ठेका मजदूरों के लिए सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित किए जाने के लिए आयोजित की जा रही है. सीटू अपनी तमाम यूनियनो को आह्वान किया है कि झारखंड मे भी इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए स्टील उद्योग के मजदूरों के साथ एकजुटता कार्यक्रम आयोजित किया जाये. हड़ताल की तैयारी के लिए 12 दिसंबर को बोकारो स्टील सिटी के सेक्टर 4 के मजदूर मैदान में इस्पात मजदूर मोर्चा (सीटू) द्वारा एक विशाल मजदूर संसद आयोजित किया जा रहा है. इसमे सीटू के अखिल भारतीय महासचिव और पूर्व सांसद तपन सेन समेत स्टील वर्कर्स फेडरेशन आफ इंडिया के नेता शामिल होंगे. इसको लेकर जानकारी सीटू झारखंड राज्य कमेटी के अध्यक्ष मिथिलेश सिंह, महासचिव प्रकाश विप्लव ने दी है. वैसे इस हड़ताल का असर झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील पर पड़ने की संभावनाएं कम है क्योंकि यहां इंटक की यूनियन मान्यता प्राप्त है और सीटू का कोई बड़ा जनाधार या मजदूरों में पैठ नहीं है. वैसे टाटा स्टील ने कहा है कि इस हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ेगा.




