जमशेदपुर : टाटा स्टील ने बीते वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 3173.78 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है. कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-2024 में 4909.61 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की हुई मीटिंग में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए एक रुपये अंकित मूल्य के प्रत्येश शेयर पर 3.60 रुपये का लाभांश देने की भी सिफारिश की है. कंपनी की ओर से जारी वित्तीय परिणाम के मुताबिक, कंपनी का सालाना रेवेन्यू 2,18,543 करोड़ रुपये रहा जबकि सारे देनदारी और कर भुगतान के पहले 25802 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया. सिर्फ टाटा स्टील के भारत के संयंत्रों में 1,33,444 करोड़ रुपये का रेवेन्यू रहा जबकि कर और अन्य देनदारी के पहले 29285 करोड़ रुपये का मुनाफा रहा. टाटा स्टील ने अब तक का सबसे अधिक 21.7 मिलियन टन क्रूड स्टील का उत्पादन किया है जबकि 20.9 मिलियन टन का स्टील का डिलीवरी कर पूर्व के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त किया है. कलिंगानगर में पांच मिलियन टन और नीलांचन इस्पात निगम लिमिटेड के विस्तार पर भी काम चल रहा है. इसके अलावा लुधियाना में आर्क फर्नेस स्टील प्लांट का निर्मख़ण कार्य चल रहा है. कंपनी की ओर से बताया गया है कि कंपनी बीते वित्तीय वर्ष में 15671 करोड़ रुपये का निवेश की है. (नीचे भी पढ़ें)
कंपनी का डेब्ट 82,579 करोड़ रुपये रहा है. कंपनी की लिक्विडिटी यानी कैश 38791 करोड़ रुपये है. टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने वित्तीय वर्ष के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा हैकि कंपनी ने विपरित परिस्थितियों में काफी बेहतर प्रोडक्शन किया है. टाटा स्टील ने 21 मिलियन टन का सबसे ज्यादा उत्पादन किया है. यह बेहतर सफलता है जबकि टाटा टिस्कॉन का सबसे बेस्ट प्रोडक्शन हुआ है. उन्होंने बताया कि कंपनी ने बीते पांच सालों में 1600 करोड़ रुपये रिसर्च और डेवलपमेंट पर किया है. आने वाले वित्तीय वर्ष में भी हम लोग बेहतर कर पायेंगे. टाटा स्टील नये साल में 40 मिलियन टन की क्षमता को विकसित करने पर काम कर रही है जबकि नोवामुंडी माइंस के सौ साल पूरे हो रहे है, जो गर्व की बात है.





