जमशेदपुर : टाटा स्टील लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है. सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि दिवालिया कंपनी के अधिग्रहण के बाद रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने पर पुराने और अनिश्चित दावों को दोबारा नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने क्लीन स्लेट सिद्धांत को बरकरार रखते हुए टाटा स्टील के खिलाफ चल रहे पुराने सिविल सूट और मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही को समाप्त करने का आदेश दिया है. मामला भूषण स्टील लिमिटेड के अधिग्रहण से जुड़ा है. टाटा स्टील ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आइबीसी) के तहत भूषण स्टील का अधिग्रहण किया था. इसके बाद वर्षा और मैसिक प्रोजेक्ट्स नामक दो आपरेशनल क्रेडिटर्स ने पुराने बकाये को लेकर टाटा स्टील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी. बाम्बे हाईकोर्ट ने इन मामलों को जारी रखने की अनुमति दी थी, जिसे टाटा स्टील ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. (नीचे भी पढ़ें)
शुक्रवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद कर दिया. अदालत ने कहा कि रेजोल्यूशन प्लान मंजूर होने के वर्षों बाद पुराने और अनिश्चित दावों को दोबारा उठाने की अनुमति देने से नई कंपनी के संचालन में बाधा आएगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण की तारीख 18 मई 2018 तक निर्धारित दावों का ही निपटारा किया जा सकता है. टाटा स्टील की ओर से अदालत में बताया गया कि छोटे लेनदारों के निपटारे के लिए रेजोल्यूशन प्लान के तहत 1200 करोड़ रुपये का प्रविधान पहले ही किया गया था. अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आइबीसी के तहत छोटे लेनदारों, एमएसएमई और स्थानीय निकायों स्थिति पर चिंता जताई. अदालत ने विधि आयोग और संसद से इन वर्गों की के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानून की समीक्षा करने का आग्रह किया.




