
जमशेदपुर : टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन का एक ऐतिहासिक पहलु है वर्किंग टूगेदर कांसेप्ट. इस कांसेप्ट के तहत करीब सौ साल होने को है और किसी तरह की अशांति कंपनी में नहीं हुई. अकेले यूनियन ने सौ साल पूरे कर लिये है जबकि कंपनी ने सौ से अधिक वर्ष पार कर लिये है. इस औद्योगिक शांति का गुर अब पूरे देश को टाटा वर्कर्स यूनियन बतायेगा कि किस तरह उन लोगों ने सामाजिक तौर पर पहल कर एक दूसरे का साथ लेकर कंपनी को आगे बढ़ाया और कर्मचारियों के बीच भी बेहतर तालमेल बनाकर बेहतर सुविरधाएं हासिल की है. यह बातें सामने आयी शुक्रवार को टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा संचालित माइकल जॉन सेंटर के अभिज्ञान कार्यक्रम के समापन के मौके पर. अभिज्ञान कार्यक्रम के तहत इस साल टाटा वर्कर्स यूनियन के 40 नये कमेटी मेंबरों को ट्रेनिंग दी गयी कि किस तरह से मैनेजमेंट और यूनियन काम करती है और किस तरह औद्योगिक शांति को बरकरार रखा जा सकता है. ये सारे कमेटी मेंबर पहली बार चुनाव जीतकर आये है. ऐसे सारे कमेटी मेंबरों को अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु और महामंत्री सतीश सिंह ने संयुक्त रुप से प्रमाण पत्र बांटे. इस मौके पर माइकल जॉन सेंटर के निदेशक जयदेव उपाध्याय भी मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु ने कहा कि देश में टाटा स्टील और टाटा समूह ही अनूठी कंपनी है, जिसमें कर्मचारियों के हितों का भी ख्याल रखा जाता है और यूनियन के डिमांड पर बहस भी होती है, लेकिन शांति बरकरार रहती है. कंपनी को साथ लेकर चला जाता है और यह आगे बढ़ता रहता है. सौ साल की शांति का इतिहास को उन्होंने कमेटी मेंबरों को जानकारी दी. इस दौरान टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह ने कहा कि हम लोगों ने मैनेजमेंट और यूनियन के आपसी तालमेल से एक इतिहास की रचना की है. पूर्वजों की मेहनत के कारण अब तक शांति बरकरार है और अब हम लोग दुनिया और देश को बताने की स्थिति में है कि किस तरह से औद्योगिक शांति को बनाये रखा जा सकता है. इसको और बेहतर कैसे रखा जा सकता है, इसके बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा सकती है. इस दौरान नये कमेटी मेंबरों को बधाई दी गयी और आशा व्यक्त किया गया कि सारे लोग कंपनी और यूनियन को मजबूत बनाते हुए मजदूरों के हितों के लिए काम करते रहेंगे.





