
Chaibasa : अखिल भारतीय परिसंघ के तत्वावधान में पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ अनुसुचित जाति / जनजाति व पिछड़ी जातियों की आरक्षण व्यवस्था पर ग्रहण और निजीकरण करने की नीति पर चिंता व्यक्त करने को लेकर ऑनलाइन मीटिंग हुई। सरकार के द्वारा आरक्षण व्यवस्था में छेड़छाड़ और रोजगार के हर क्षेत्र को निजीकरण करने की पहल को परिसंघ ने बहुत घातक बताया। ऑनलाइन मीटिंग में चिंता व्यक्त की गयी कि आरक्षण व्यवस्था को निरस्त करने और निजीकरण से एसटी-एससी व ओबीसी समुदाय की सामाजिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। चूंकि निम्न वर्गों का उत्थान आरक्षण व्यवस्था के बल पर ही हुआ है, जिस कारण राष्ट्र की मुख्यधारा में आसानी से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
मीटिंग में जुड़े सभी सदस्यों ने एक स्वर से कहा कि आदिवासी व दलित समाज को ऊंचे मुकाम हासिल करने और सम्मानजनक स्थिति में पहुंचने में आरक्षण व्यवस्था का सबसे बड़ा योगदान है। इस व्यवस्था में किसी तरह का छेड़छाड़ करने से देश की सामाजिक समरसता में फिर से असमानता आ जाएगी और हम सदा शोषित वर्ग के रूप में संघर्ष करते नजर आएंगे। मीटिंग का संचालन परिसंघ के वाइस जेनरल सेक्रेटरी दामोदर सिंकू ने किया। परिसंघ के प्रदेश अध्यक्ष एलएम उरांव, कार्यकारी अध्यक्ष छोटू राम,प्रदेश उपाध्यक्ष बालगोविंद राम, उपाध्यक्ष डॉ.लेयो कोया, सुखदेव बारी, प्रो हर्षमती सिंकू, रेणु प्रकाश, डॉ दमयंती सिंकु व अन्य ने सामाजिक मजबूती कायम रखने और शोषण से बचने के लिए परिसंघ जैसे ऊंचे संगठन से जुड़ने पर बल दिया। सभी पदाधिकारियों ने परिसंघ के उद्देश्य और इनकी महत्ता पर विस्तार से बात रखी।
पश्चिमी सिंहभूम जिले की ओर से मीटिंग में शामिल विमल किशोर बोयपाई, शालिनी पुरती और कृष्णा देवगम, मंगल सिंह मुंडा, दामू सुंडी, अनिता सोय ने कहा कि आरक्षण के नियमों को उचित तरीके से लागू कराने के लिए एक मजबूत मंच की आवश्यकता महसूस की जा रहा है, ताकि इसके बैनर तले अपनी समस्याओं को ऊंचे स्तर तक पहुंचा पायें। लिहाजा पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षक व कर्मचारी भी परिसंघ सरीखे संगठन के पक्षधर हैं। मीटिंग में विशेष आमंत्रित परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ उदित राय ने विस्तार से आरक्षण व्यवस्था की जरूरत और इसकी महत्ता तथा संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही डॉ भीमराव आम्बेडकर के सपनों का भारत की परिकल्पना पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि डॉ आम्बेडकर का सपना था कि देश के हर समुदाय की आर्थिक व सामाजिक सुदृढ़ता हो। देश के नवनिर्माण में हर समुदाय की भागीदारी में जरूरत से ज्यादा असमानता नहीं हो। इसके लिए आर्थिक पहलू का मजबूत होना नितांत आवश्यक है। तभी सामाजिक उत्थान का उद्देश्य फलीभूत होगा। लिहाजा आरक्षण व्यवस्था में छेड़छाड़ बेमानी है।








