
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) आदित्य रंजन द्वारा सोमवार को झींकपानी प्रखंड अंतर्गत दो पंचायत चोया और नवागाँव के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया. चोया पंचायत में बिरसा मुंडा आम बागवानी योजना के तहत निरीक्षण किया गया तथा नवागांव में मनरेगा के तहत निर्माणशील कच्ची नाली का अवलोकन किया गया. निरीक्षण के क्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी झींकपानी, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, एटीएम, बीटीएम, कनीय अभियंता मनरेगा मजदूर उपस्थित रहे। उपस्थित पदाधिकारियों व कर्मियों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का नियमतः व्यवहार किया गया. उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन द्वारा झींकपानी प्रखंड अंतर्गत चोया पंचायत में बागवानी हेतु स्थल निरीक्षण किया गया.

निरीक्षण के क्रम में उप विकास आयुक्त द्वारा बागवानी हेतु उपलब्ध भूमि को देखा गया और जल स्रोत के माध्यम की भी जांच की गई. उन्होंने प्रगतिशील किसानों से वार्तालाप भी किया. इसके बाद उप विकास आयुक्त द्वारा नवागांव में मनरेगा के तहत निर्माणशील कच्ची नाली की जांच की गई तथा काम कर रहे मनरेगा मजदूरों से उनकी समस्याओं के बारे में अवगत भी हुए. उन्होंने निर्देश दिया कि जितने भी मजदूर कार्यरत हैं, उनका भुगतान समय से किया जाए तथा जो बाहर के मजदूर अभी आ रहे हैं उनका क्वॉरेंटाइन पीरियड खत्म होने के पश्चात् उन्हें भी कार्य के साथ जोड़ा जाए. इसी तरह उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन द्वारा तांतनगर प्रखंड अंतर्गत दो पंचायत कान्तीया और टागरपोखरिया के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण बिरसा मुंडा बागवानी योजना के तहत् किया गया. निरीक्षण के क्रम में मुंडा, मुखिया, प्रखंड विकास पदाधिकारी तांतनगर, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, एटीएम, बीटीएम, कनीय अभियंता तथा अन्य उपस्थित रहे। उपस्थित पदाधिकारियों व कर्मियों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का नियमतः व्यवहार किया गया. निरीक्षण के क्रम में उप विकास आयुक्त द्वारा बागवानी हेतु उपलब्ध भूमि की जांच की गई और जल स्रोत के माध्यम को भी देखा गया. प्रायः दोनों जगहों पर जल स्रोत पर्याप्त मात्रा में पाया गया तथा मौके पर उप विकास आयुक्त द्वारा अनुभवी कृषकों से भी बातचीत की गई.

मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिन के रोजगार की गारंटी देना व आजीविका वर्द्धन और गांव की मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए परिसंपत्ति का निर्माण करना है. मनरेगा अंतर्गत आम बागवानी करने से किसान अपने बागान में 100 दिनों का कार्य मनरेगा में कर सकते हैं, जिससे अपनी परिसंपत्ति भी बनेगी और मजदूरी भी प्राप्त होगी. किसान मित्र अपने 1 एकड़ आम बागान में खेती-बाड़ी कर कम से कम 15 से 20 हजार प्रति वर्ष आय कर सकते हैं, एवं चौथे वर्ष से 30 हजार की आय आम के फलों से मिलना प्रारंभ हो जाती है, जो कि 10 साल से लगभग एक लाख प्रति वर्ष तक होगी एवं यह आय 25 से 30 सालों तक समान रूप से मिलती रहेगी.















