
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित नोवामुंडी में खेती की पारंपरिक पद्धति, आधुनिक तकनीकों और नवाचार के उपयोग के साथ एक मूक क्रांति के दौर से गुजर रही है. ऐसी ही एक तकनीक ‘ड्रिप सिंचाई खेती’ के साथ-साथ पॉलिथीन मल्चिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल नोवामुंडी में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. टाटा स्टील फाउंडेशन की मदद से पोखेरपी पंचायत के रेंगरबेड़ा गांव की किसान सनमिता बोबोंगा नोवामुंडी में ड्रिप सिंचाई खेती अपनाने वाले शुरुआती किसानों में से एक हैं. वह कहती हैं, “हम सिंचाई विभाग, चाईबासा के सहयोग से ड्रिप सिंचाई स्थापित करने में सक्षम हुए हैं. टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा ड्रिप के साथ दिए गए मल्चिंग पॉलिथीन शीट से मुझे सब्जी उत्पादन दोगुना करने में मदद मिली. अब तो उत्पादन जैसे आसमान छूने लगा है, इसलिए मैं केवल नोवामुंडी में ही नहीं, बल्कि ओडिशा के बड़बिल और पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा जैसे आस-पास के स्थानों में भी सब्जियां बेचती हूं.
सनमिता के पास रेंगरबेड़ा गांव में चार एकड़ ज़मीन है. फूलगोभी, बैगन, टमाटर और बीन्स जैसी सब्जियां उगाने के लिए इन दो नई तकनीकों को अपनाने के साथ, उसकी वार्षिक आय में 50,000 रुपये से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि हुई है. इस अतिरिक्त आय की मदद से अब वह अपने बेटे को एक निजी स्कूल में पढ़ा रही है. वह अपने गाँव के अन्य परिवारों के लिए एक प्रेरणा बन गयी है.
सनमिता के अनुसार, “मैं लोगों को यह बताने में बहुत गर्व महसूस करती हूं कि मैं एक किसान हूं, जब लोग मेरे पास आते हैं और अपने खेतों में सब्जी की उत्पादकता में सुधार करने के तरीकों एवं साधनों के बारे में मेरी सलाह लेते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुझे लगता है कि मेरे गांव के लोगों को सब्जी की खेती करने के तरीकों को सुधारने के लिए नवीन और आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह देना मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि इससे उनके समय, ऊर्जा और श्रम की बचत होती है. पहले किसानों को कम उत्पादक भूमि को सिंचित करने के लिए थका देने वाले मैनुअल काम में बहुत अधिक समय लगाना पड़ता था. इस आधुनिक ड्रिप तकनीक को अपनाने से किसान जमीन में समय, ऊर्जा और पानी की खपत को बचा पाएंगे. इसके अलावा, यह तकनीक उनके मुनाफे को बढ़ाने में भी मदद करेगी.







