
Chaibasa : कुमारडुंगी प्रखंड अंतर्गत बाईहातु गांव में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में रमेश जेराई ने मानवाधिकार के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध की त्रासदि के बाद विश्व में शांति बहाल करने के लिये यूएनओ का गठन 1945 में किया गया. विश्वयुद्ध किसी भी देश के हित में नहीं है. इसलिए10 दिसम्बर 1948 सर्वभौमिक घोषणा पत्र मानवाधिकार पर किया गया. इसी के साथ 10 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस का आयोजन किया जाता है. मानवाधिकार के हनन को रोकने के लिये हमारा दायित्व है कि हम अपनी जिम्मेदारी समझें. हमें जानना होगा कि हमारा क्या अधिकार है.

समाजसेवी सिद्धार्थ पाड़ेया ने कहा विकास लक्ष्यों को हासिल करने में युवाओं की सहभागिता बहुत जरूरी है. किसी भी तरह का बदलाव लाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. सकारात्मक बदलाव के लिए युवा जमीनी स्तर पर जुटने वालों में सबसे आगे रहते हैं और एक बेहतर कल के लिए नए विचार और समाधान लाते हैं. जितने जरूरी कानून एवं मानव अधिकार हैं, उन सभी अधिकारों को आमजनों तक पहुंचाने का दायित्व हम युवाओं को लेने की आवश्यकता है. हीरामणि देवगम ने महिलाओं के अधिकार, सुनील पुरती ने शिक्षा के अधिकार एवं सुखलाल सिंकू ने वनाधिकार पर अपने विचार रखे. दुम्बीसाई हिसिर ग्रुप द्वारा नाटक का मंचन एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम माध्यम से लोगों के बीच जागरूक लाने का प्रयास किया गया.य इस अवसर पर तीरांदाजी प्रतियोगिता एवं अन्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. कार्यक्रम के समापन पर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मंच संचालक गुरुचरण बागे, रंजीत बागे, उपेंद्र बागे, फूलचंद बागे, गीता बिरुवा, सीता बिरुवा, सतसिला बिरूवा व अन्य की सराहनीय भूमिका रही.







