
चाकुलिया : चाकुलिया के पुराना बाजार स्थित चावोवीरो मंदिर में रुंगटा परिवार द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन कथा वाचक रामशंकर जी महराज ने कहा कि गाय की सेवा करनी चाहिए. गौ माता का स्वरूप हैं. जब कभी धरती पर अत्याचार बढ़ता है तो सबसे पहले गाय ही दुखी होती है. गाय की रक्षा करें, गाय की रक्षा करने से ब्राम्हण की रक्षा होगी. ब्राम्हण की रक्षा होगी तो ग्रंथ की रक्षा होगी और ग्रंथ की रक्षा से मानव और धर्म की रक्षा होगी. इसलिए घर में गौ का पालन करें और गाय की रक्षा करें. कहा कि सती नहीं रहेगी, तो धरती पर राक्षस बढ़ जाएगें. आज भाइयों के बीच प्रेम नहीं है. रामायण से शिक्षा लें और प्रेम हो तो राम-भरत के समान भाइयों में प्रेम होना चाहिए. भरत चरित्र से शिक्षा लें. भरत कथा को जीवन में उतारें. इससे प्रेम और भक्ति आएगा जीवन सफल होगा. राम-भरत भाइयों का प्रेम अनुकरणीय है. जब तक मन संसार में रहेगा, हमारे दुश्मन हजारों होगें परंतु मन प्रभु के चरण में होगा तो हजारों दुश्मन हमारे दोस्त बन जाते हैं. भक्त कभी भी संपत्ति को अपना नहीं मानते वही सही मायने में भक्त हैं. लक्ष्मी नारायण का सेवक बन कर रहो, जब दोनों साथ रहेंगे तो संपत्ति सुख देगी. यह जो जीव हैं वह भगवान के अंश है. मनुष्य जीवन मिला है तो भगवान की सेवा करें, भक्ति करें जीवन का सदुपयोग करें. संतो से जुड़ें तो हम भगवान से जुड़ जाएगें. आचार्य परंपरा से भगवान से जुड़ सकते हैं.

महाराज जी ने कहा कि बुजुर्गों की बातें माननी चाहिए. क्योंकि बुजुर्गों को अनुभव होता है. अगर बुजुर्गों की बातें न माने तो अनिष्ट होता है. रामायण में इसका उदाहरण है. रावण अगर अपने बुजुर्ग की बात माना होता तो उसकी मौत नही होती और राजपाट नहीं जाता और उनके वंशज मरते नहीं. जब राम किसी को अपना बना लें वह पूज्य और पुण्य हो जाता है. भक्ति में शक्ति है. सेवा धर्म बड़ा कठिन है. सेवक को पराधीन होना पड़ता है. ‘अर्थ चाहिए ना धन चाहिए कौशल्या तुम्हारा राम चाहिए …’ भजन पर श्रोता भक्ति के रस में डूब गये. भरत और भारद्वाज मिलन प्रसंग पर महाराज जी ने कहा कि भगवान के दर्शन से श्रेष्ठ है भक्तों का दर्शन होना. भगवान की आराधना से भक्तों की आराधना श्रेष्ठ है. भक्त और संत की सेवा करने से भक्त और भगवान दोनों की सेवा हो जाती है. राम भक्ति सिद्धि के श्रीगणेश होने के समान है. जिस साधन से राम प्रकट होते हैं वह भरत तुम हो, भगवान प्रेम से प्रकट होते हैं. भरत का प्रेम राम से होता नही तो संसार के लोग प्रेम और भक्ति को नहीं जानते. जो भगवान के प्रेमी होते हैं वह भोग विलास के आसत्य नहीं होते हैं. भक्त के भक्ति पर शंका कभी नही करनी चाहिए. भरत और राम मिलन प्रेम का है. ‘सीखो प्यारे प्रेम बढ़ा बैर बढ़ाना मत सीखो …’ भजन गाकर उन्होंने प्रेम का संदेश दिया. इस अवसर पर शंकर रुंगटा, गणेश रुंगटा, विनीत रुंगटा, कौशल रुंगटा, परमेश्वर रुंगटा, विजय रुंगटा, वीरेन्द्र तिवारी, कन्हैया सहल, मुन्ना सिंह, मारकंडेय मिश्रा, मदन महतो, गोपाल रुंगटा, संजय लोधा समेत काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे.






