जमशेदपुर : रघुवर की तरह हेमन्त की नीयत में भी ठेका एवं असंगठित मजदूरों का शोषण रोकना नहीं है. यह बात झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन के महासचिव एसके घोष ने कही. वह शनिवार को साकची स्थित संगठन कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि रघुवर दास जब राज्य के मुख्यमंत्री बने उन्होंने तुरन्त श्रम विभाग के अधिकारी के द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों को समय-समय पर श्रम कानूनों का पालन मालिकों द्वारा किया जा रहा है या नहीं? यह जाँच करने का अधिकार (इंसपेक्टर राज) पूर्ण रूप से छीन लिया गया, जिस कारण लगभग सभी प्रतिष्ठानों में निधारित आठ घंटे काम के बदले 12 से 14 घंटा काम मजदूरों से कराया जा रहा है. विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल, नर्सिंग होम, नगर निकाय प्राईवेट कॉलोनी, मॉल, बड़े-बड़े होटल आदि में कार्यरत सफाई कर्मी, कर्मी जो मुख्य रूप से घासी, आदिवासी एवं अन्य गरीब तबके के अनेक लोग साफ-सफाई कार्य का निष्पादन करते हैं, उन्हें आज भी प्रतिमाह चार-पांच हजार रुपये मात्र मिल पाता है. इसी क्रम में लगभग 25 हजार झारखंड बिजली निगम में सर्विस प्रोवॉइडर के माध्यम से कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी मिलना तो दूर की बात है, सर्विस प्रोवाइडर द्वारा काम कराने के बाद भी मजदूरी नहीं दी जाती है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्थायी प्रकृति के कार्यों में 90 प्रतिशत ठेका मजदूर कार्य करते हैं, जिन्हें मामूली से मजदूरी के सिवा और कुछ नहीं मिलता है, जबकि जमशेदपुर के टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टीनप्लेट कम्पनी, टयूब कम्पनी, तार कम्पनी एवं टीआरएफ कम्पनी में ठेका मजदूरों से स्थायी प्रवृति के काम करवाना प्रतिबंधित है. श्री घोष ने कहा कि टाटा स्टील के स्थायी आदेश (स्टेनडींग ऑर्डर) तथा कम्पनी के नीति के अनुसार दलित एवं आदिवासियों को परमानेन्ट कार्य में बहाली के लिए प्राथमिकता देना है, लेकिन आज तक एक भी दलित एवं आदिवासी को इसके तहत परमानेन्ट नौकरी नहीं दी गई है. जमशेदपुर के कारखानों / प्रतिष्ठानों में प्रबंधनों के द्वारा ठेका मजदूरों को दमन करने के लिए बाउन्सर पाल कर रखा हैं. वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि असंगठित क्षेत्र निर्माण कार्य, ठेका कार्य में अधिकतर पेटी ठेकेदारों के माध्यम से कार्य करवाया जा रहा है, जो किसी न किसी राजनीतिक दल के व्यक्ति होते हैं और गरीब मजदूरों पर अपना प्रभाव दिखाते हैं और जुल्म / शोषण करते हैं.


