जमशेदपुर : टाटा स्टील की आमसभा (एजीएम) समाप्त होने के बाद अब टाटा वर्कर्स यूनियन ने बोनस का समझौता करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है. इसको लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु ने टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन को पत्र लिख दिया है. इस पत्र में टाटा वर्कर्स यूनियन ने कहा है कि आने वाले दिनों में फेस्टीव सीजन आने वाला है, इस कारण पूर्व की तरह इस साल भी कर्मचारियों का बोनस वार्ता शुरू कर दिया जाये ताकि जल्द से जल्द बोनस शुरू हो सके. यह परिपाटी रही है कि टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष की ओर से बोनस वार्ता के लिए मैनेजमेंट को पत्र लिखा जाता है और फिर आमसभा के बाद इसको लेकर पत्र लिखकर वार्ता शुरू हो जाती है. इसको देखते हुए वार्ता के लिए पत्र लिखा गया है. टाटा वर्कर्स यूनियन यह कोशिश कर रही है कि पिछले साल जिस तरह का फार्मूला था, उसी फार्मूला के तहत ही इस बार भी बोनस दिलाया जाये. पिछले बार के फार्मूला के आधार पर ही अगर बोनस हुआ तो कर्मचारी मालामाल हो जायेंगे. वैसे टाटा स्टील ने अपने शेयरधारकों के डिविडेंड में काफी बढ़ोत्तरी की है. 51 रुपये तक का डिविडेंड फिक्स किया गया है. पिछली बार 25 रुपये का डिविडेंड मिला था, जो लगभग दोगुना है. ऐसे में कर्मचारियों को प्रोफिट के आधार पर ही बोनस दिया जाता है. इस लिहाज से उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी बेहतर बोनस होगा. पिछले साल टाटा स्टील में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह के संयुक्त प्रयास से पुराना ही फार्मूला पर बोनस समझौता हुआ था. पूर्व अध्यक्ष आर रवि प्रसाद की अध्यक्षता वाली यूनियन की ओर से किये गये बोनस समझौता के फार्मूला के आधार पर ही बोनस समझौता किया गया था, जिसके तहत कंपनी के मुनाफा 9752.13 करोड़ रुपये के एवज में 146.28 करोड़ रुपये, सेलेबल स्टील 12.04 टन था, प्रोफिटेबिलिटी 8098 प्रति टन सेलेबल स्टील पर 51.5 करोड़ रुपये, क्रूड स्टील की बिक्री 12.19 टन और कर्मचारी कुल थे 22871, जिसकी प्रोडक्टिविटी के तहत 533 प्रति कर्मचारी प्रति टन प्रति वर्ष के लिहाज से इस पर 72.5 करोड़ रुपये मिला था. सेफ्टी पर एक भी रुपये नहीं दिया गया गया. तय समझौता के तहत कर्मचारियों को 270.28 करोड़ रुपये बांटे गये थे. इसके तहत कुल 22871 कर्मचारियों के बीच यह राशि बांटी गयी थी, जिसमें जमशेदपुर प्लांट में 12558 कर्मचारी पिछले साल थे. अगर प्रतिशत के आधार को निकाला जाये तो बोनस की राशि करीब 16 फीसदी हुई थी, उससे पहले के साल में 12.9 फीसदी राशि हुई थी. पिछले साल बोनस के मद में कुल 235.54 करोड़ रुपये कर्मचारियों के बीच बांटे गये थे.
किस वर्ष, कितना मिला बोनस :
वर्ष—–कंपनी का मुनाफा—बोनस की राशि—बोनस का प्रतिशत (नीचे पूरी खबर पढ़ें)
1991-160.13 करोड़ रुपये-38.6 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1992-214.16 करोड़ रुपये-44.54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1993-127.12 करोड़ रुपये-50.75 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1994-180.84 करोड़ रुपये-54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1995-281.12 करोड़ रुपये-66.04 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1996-465.79 करोड़ रुपये-76.46 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1997-469.21 करोड़ रुपये-75.86 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1998-322.08 करोड़ रुपये-72.83 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
1999-282.23 करोड़ रुपये-69.61 करोड़ रुपये-16 फीसदी
2000-422.59 करोड़ रुपये-75.55 करोड़ रुपये-18 फीसदी
2001-553.44 करोड़ रुपये-83 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2002-204.90 करोड़ रुपये-78 करोड़ रुपये-15 फीसदी
2003-1012.31 करोड़ रुपये-102.07 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2004-1746.22 करोड़ रुपये-102 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2005-3474.16 करोड़ रुपये-98.1 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2006-3506.38 करोड़ रुपये-102.01 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2007-4222.15 करोड़ रुपये-107 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2008-4687.03 करोड़ रुपये-113 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2009-5201.74 करोड़ रुपये-139 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2010-5046.80 करोड़ रुपये-143 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
2011-6217.69 करोड़ रुपये-171 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2012-6184 करोड़ रुपये-182.47 करोड़ रुपये-17.69 फीसदी
2013-5050.64 करोड़ रुपये-180.50 करोड़ रुपये-16.01 फीसदी
2014-6553.95 करोड़ रुपये-193.34 करोड़ रुपये-15.46 फीसदी
2015-6500 करोड़ रुपये-154.72 करोड़ रुपये-8.53 फीसदी
2016-4900 करोड़ रुपये-130 करोड़ रुपये-8.60 फीसदी
2017-3933.17 करोड़ रुपये-164 करोड़ रुपये-11.27 फीसदी
2018-6682.49 करोड़ रुपये-203.24 करोड़ रुपये-12.54 फीसदी
2019-6323 करोड़ रुपये-239.61 करोड़ रुपये-15.86 फीसदी
2020-7935.89 करोड़ रुपये-235.54 करोड़ रुपये-12.9 फीसदी
2021-9752.13 करोड़ रुपये-270.28 करोड़ रुपये-16 फीसदी





