जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. इसके माध्यम से श्री राय ने मुख्य सचिव से जमशेदपुर स्थित केबुल कंपनी (मेसर्स इंकैब इंडस्ट्री) के विषय में सरकार हस्तक्षेप करने, मजदूरों को न्याय दिलाये और इंकैब कंपनी परिसम्पतियों (जो झारखंड की है) की रक्षा करने की दिशा में यथोचित कदम उठाने की मांग की है. श्री राय ने लिखा है कि झारखण्ड विधानसभा में वह निजी संकल्प, ध्यानाकर्षण एवं अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से यह विषय तीन बार उठा चुके हैं. हर बार सरकार का यह जवाब रहा है कि यह मामला एनसीएलटी में है. एनसीएलटी के फैसले के अनुसार सरकार कदम उठायेगी। साथ ही श्री राय ने मुख्य सचिव का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि विधानसभा में आवाज उठाने के साथ ही उन्हें (मुख्य सचिव) भी वर्ष 2020 में 6 अक्टूबर, वर्ष 2021 में 18 अक्टूबर, उसी वर्ष 15 सितंबर और 29 सितंबर को को पत्र लिखा था. मुख्य सचिव को पत्र के माध्यम से श्री राय ने बताया है कि विधानसभा में मेरे द्वारा की गई पृच्छाओं के उत्तरों के अनुरूप सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे, ताकि रूग्ण केबुल कम्पनी के अवकाश प्राप्त एवं कार्यरत मजदूरों को उनका हक मिल सके और कम्पनी की परिसम्पतियों की रक्षा हो सके. (नीचे भी पढ़ें)
विधायक सरयू राय ने बताया है कि झारखण्ड सरकार के पुलिस महानिदेशक को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है। साथ ही उन्होंने विधानसभा में अपने द्वारा की गयी पृच्छाओं के उत्तर, मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को प्रेषित पत्रों का अनुलग्नक उपलब्ध कराया है. श्री राय ने मुख्य सचिव का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि इस विषय में मेरे साथ मुख्यमंत्री स्तर, मुख्य सचिव स्तर तथा उद्योग सचिव एवं उद्योग निदेशक के स्तर पर कई बैठकें एवं वार्ताएं हुई हैं. हर बार यही कहा गया कि इस विषय में राज्य सरकार किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकती है, इसके बारे में महाधिवक्ता की राय ली जायेगी. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने इस विषय में एक संक्षिप्त मंतव्य भी सरकार को भेजा है, जो अनुलग्नक के साथ में है. श्री राय ने दुखद आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार ने इस विषय में अब तक कोई सार्थक पहल नहीं की है। केबुल कंपनी के मजदूर अपनी लड़ाई एनसीएलटी और एनसीएलएटी में लड़ रहे हैं. एनसीएलटी ने इंकैब कंपनी के परिसमापन का आदेश दिया था। मजदूरों ने उसे एनसीएलएटी में चुनौती दी. एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के परिसमापन आदेश को निरस्त कर मजदूरों के हक में फैसला देकर कंपनी को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया तथा लिक्विडेटर शशि अग्रवाल के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां कर उन्हें हटा दिया. (नीचे भी पढ़ें)
सरयू राय ने कहा है कि उक्त आदेश के खिलाफ लिक्विडेटर, कमला मिल्स और रमेश घमंडीराम जिनके गैरकानूनी नियंत्रण में अभी इंकैब कंपनी है उक्त आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गये, पर वहां भी उन्हें शिकस्त मिली और मजदूरों के हक में फैसला आया. बाद में आरबीबीआई ने अमानत में खयानत करने के जुर्म में पूर्व लिक्विडेटर शशि अग्रवाल की रिजोल्यूशन प्रोफेशनल बनने की अर्हता समाप्त कर दी. एनसीएलटी कोलकाता बेंच में अभी भी सुनवाई जारी है. नया रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल रमेश घमंडीराम के साथ मिलकर कोशिश कर रहा है कि कंपनी का पुनरुद्धार न हो और इंकैब की परिसंपत्तियों का बंदरबाट हो जाये. यदि राज्य सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया होता तो मजदूरों का हित शत-प्रतिशत सुरक्षित हो चुका होता और इसकी परिसंपत्तियों के साथ इस कंपनी का पुनरुद्धार हो गया होता जो झारखंड में रोजगार और राजस्व दोनों के लिए जरूरी है. परन्तु दुर्भाग्य है कि ऐसा नहीं हो पाया. (नीचे भी पढ़ें)
इसके साथ ही अन्य संबंधित जानकारियों को उपलब्ध कराते हुए विधायक सरयू राय ने रहा है कि कंपनी परिचालन के क्षेत्र में कम्पनी अधिनियमों के प्रावधानों को तोड़-मरोड़कर अपना स्वार्थ साधने वाले उद्योगपतियों / व्यवसायियों की नजर उनके अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक हितों के अनुरूप हो सकती है, परन्तु राज्य सरकार की पहल इस मामले में जनहित, मजदूर हित एवं सरकारी परिसम्पतियों के संरक्षण करने के अनुरूप होनी चाहिए. अत: एक बार पुनः श्री राय ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि जमशेदपुर की केबुल कंपनी के साथ विगत 20-25 वर्षों से हो रहे खिलवाड़ के संदर्भ में निहित षडयंत्र को नाकाम करने तथा मजदूरों के हितों का संरक्षण करने के लिए राज्य सरकार की परिसंपति की रक्षा करने के लिए राज्य सरकार आवश्यक पहल करे तथा राज्यहित एवं जनहित में अद्यतन स्थिति के कानूनी पहलुओं के अनुरूप सार्थक हस्तक्षेप करे.





