
जमशेदपुर : जमशेदपुर के कदमा शास्त्री नगर में दंगा भड़काने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोपियों को गुरुवार को 14 साल बाद न्यायलय ने साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया. इस मामले में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुधांशु ओझा, उमेश सिंह, भुवनेश्वर सिंह, अशोक तिवारी, राजेश सिंह और राजकुमार राय को आरोपी बनाया गया था. वहीं इसी मामले से जुड़े एक अलग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ भी सभी आरोपियों को थाना से भगाने का आरोप है जो फिलहाल रांची न्यायलय में विचाराधीन है. गुरुवार को एसडीजेएम रंजय कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को बरी किया गया. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता चंद्र भुषण ओझा और अधिवक्ता प्रभात शंकर तिवारी ने अपना पक्ष रखा. अधिवक्ता प्रभात शंकर ने बताया कि मामला साल 2007 का है. शास्त्रीनगर में एक मंदिर निर्माण को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था. इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. सभी के खिलाफ दंगा भड़काने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगा था. इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री जो घटना के समय क्षेत्र के विधायक थे वे थाना पहुंचे जिससे थाने में भीड़ लग गया था. इसी बीच मौका पाकर सभी आरोपी थाने से भाग गए थे. पुलिस ने रघुवर दास के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले में कुल तीन मुकदमा दर्ज हुआ था. एक मुकदमा टाटा स्टील द्वारा अतिक्रमण का केस किया गया था, जिसमें सारे आरोपी बरी हो चुके है. वहीं, दूसरा केस यह था, जिस पर गुरुवार को फैसला आया, जिसमें यह कहा गया था कि मंदिर के लिए जमीन की घेराबंदी कर दंगा भड़काने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा तीसरा केस थाना के हाजत से सुधांशु ओझा को भगाने का मामला था, जो अभी स्पेशल कोर्ट में सुनवाई चल रही है.





