
जमशेदपुर : सत्ता जाते ही भाजपाइयों को एनएच 33 का दर्द नजर आने लगा है. इतना ही नहीं अब इन्हें ये भी याद आ रहा है कि एनएचआई का कार्यकाल भी जमशेदपुर में नहीं है. वैसे जो समस्या इनके नेताओं को सत्ता में रहते नजर नहीं आई कम से कम सत्ता से दूर होने के बाद बतौर विपक्ष नजर आने लगी. जमशेदपुर से होकर गुजरने वाली एनएच 33, जो आए दिन किसी न किसी बात को लेकर चर्चा में रहता है. कभी पानी का पाइपलाइन फट जाता है, तो कभी सड़क पर जहां तहां गड्ढों में जलजमाव से जनजीवन बेहाल हो जाता है. वैसे जमशेदपुर जिला मुख्यालय पहुंचे भाजपाइयों का आरोप है, कि अब यह सड़क हाथी का दांत हो चला है.
इनका आरोप है कि इस सड़क को लेकर बार-बार संवेदकों को बदले जाने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. निश्चित तौर पर भाजपाइयों के आरोप में दम है, लेकिन जरा ये तो बता दे, कि झारखंड के वर्तमान सरकार को सत्ता संभाले कितना वक्त हुआ है, और आप जरा यह भी बता दें कि पिछले 6 सालों से केंद्र के सत्ता में कौन सी सरकार बैठी है, और एनएचएआई की मॉनिटरिंग का जिम्मा किसके हाथों होता है. वैसे जब डबल इंजन की सरकार आप चला रहे थे तो फिर इस सड़क को लेकर गम्भीरता क्यों नहीं दिखाए. हालांकि तत्कालीन जमशेदपुर पश्चिम के भाजपा विधायक सह मंत्री सरयू राय ने जरूर एनएचएआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, लेकिन उसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा. खैर देर ही सही कम से कम आपने आवाज तो उठाई. हालांकि जिले के उपायुक्त के निर्देश के बाद एक बार फिर से एनएच-33 का काम रोक दिया गया है. वैसे सूत्रों की अगर मानें तो पूरा मामला कमीशन के खेल का है.





