
दुमका : झारखंड मुक्ति मोर्चा का 43वां स्थापना दिवस समारोह उपराजधानी दुमका में आयोजित किया गया. इस दौरान झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष गुरुजी शिबू सोरेन, कार्यकारी अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय महासचिव बिनोद पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य, तमाम मंत्री और विधायक मौजूद थे. दुमका के गांधी मैदान में आयोजित इस समारोह की शुरुआत झामुमो का झंडे को फहराकर किया गया. इसके अलावा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इस दौरान अपने संबोधन में गुरुजी शिबू सोरेन ने कहा कि झामुमो की स्थापना करने के पीछे अलग राज्य आंदोलन को आधार बताया, लेकिन अब झारखंड को संवारने का वक्त आ गया है. इसके लिए सभी को तत्पर रहना होगा. उन्होंने कहा कि फांसीवादी लोगों और भाजपा से बचकर रहना होगा. (नीचे पढ़े पूरी खबर)

इस दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अलग राज्य का आंदोलन लड़कर लिया गया. अब झारखंड को संवारने का काम झारखंड की जनता की अपनी सरकार कर रही है. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने पारा शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया और पठन-पाठन को दुरुस्त करने में सफलता पायी. वहीं, अब हम लोग सरकार की ओर से इंग्लिश स्कूल खोलने जा रहे है, जो हर जिले में होगी और यह प्राइवेट स्कूलों से भी अच्छी होगी. उन्होंने कहा कि पिछली रघुवर दास की सरकार ने झारखंड को काफी पीछे ढकेल दिया है. राज्य के खजानें को खाली कर दिया है. नये झारखंड में पेट पर गमछा बांधकर जीने वालों को हक और उनका अधिकार मिलेगा. उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति रहती तो दुमका में खचाखच भीड़ रहती, लेकिन कोरोना के काल में भीड़ नहीं लगाना है और सबको सतर्क रहकर राज्य के हितों में काम करना है. उन्होंने कहा कि केंद्र की उपक्रम झारखंड में चल रही है और यहां के लोगों को ही केंद्र सरकार उनका हक और अधिकार नहीं दे रही है. अब केंद्र सरकार एक करोड़ रुपये का टेंडर विस्थापितों को देने पर राजी हुई है. यह राज्य सरकार की मांग का ही असर है. भाजपा की लूटिया अब डूबने वाली है. यूपी के चुनाव से लेकर पांचों राज्यों में भाजपा की हालत पतली हो चुकी है. (नीचे पढ़े पूरी खबर)

इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बंसत सोरेन, भाभी सीता सोरेन समेत अन्य लोगों ने हिस्सा लिया. इस मौके पर बसंत सोरेन ने कहा कि दुमका सिर्फ नाम की ही उपराजधानी है. सरकार ने मसलिया में 1200 करोड़ रुपये की सिंचाई योजना दी है. शिकारीपाड़ा में 700 करोड़ की सिंचाई योजना स्वीकृत हुई है. दुमका को लेकिन पूरे तौर पर उपराजधानी बनाये जाने की जरूरत है. दुमका में मिनी सचिवालय की स्थापना की जरूरत है. हाईकोर्ट का अलग बेंच यहां खोले जाने की जरूरत है. इस मौके पर झामुमो के विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाभी सीता सोरेन ने कहा कि शिबू सोरेन के संघर्ष का नतजा है कि आज अलग राज्य झारखंड हुआ है. आदिवासी और मूलवासियों को दबाने की कोशिश पूर्ववर्ती सरकार ने किया है. वर्तमान सरकार के नेतृत्व में विकास की गति तेज हुई है. रघुवर सरकार ने सिर्फ ठगने का काम किया है. (नीचे पढ़े पूरी खबर)

झामुमो की हुई थी 1977 में स्थापना, कोल्हान और जमशेदपुर का था बड़ा रोल, कोल्हान को ही भूलती जा रही झामुमो
झामुमो की स्थापना 2 फरवरी 1973 को धनबाद में पहली बार हुई थी. 4 फरवरी को इसकी स्थापना गुरुजी शिबू सोरेन, एके राय और बिनोद बिहारी महतो ने मिलकर किया था. उस वक्त शिबू सोरेन झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष बने. इसके बाद झामुमो की पहली कमेटी 1977 को दो फरवरी को बनायी गयी. उसी दिन से इसका स्थापना दिवस मनाया जाता है. 1977 में दुमका के एसपी कॉलेज में दो फरवरी को इसकी स्थापना की गयी थी, तब संसाधन नहीं थे. उस वक्त झारखंड अलग राज्य का आंदोलन चलाने का जुनून था, जो जुनून जारी रहा और अलग राज्य बना. इस बीच सरकार में झामुमो आती रही, जाती रही, बिहार हो या फिर केंद्र सरकार, हर जगह झामुमो की धमक सुनायी दी जाती रही. वैसे झामुमो को नया गति देने का काम कोल्हान यानी जमशेदपुर से शुरू हुआ, जब झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष निर्मल महतो की हत्या हुई. 8 अगस्त 1987 को निर्मल दा की हत्या हुई. इसके बाद ही आंदोलन तेज हुआ, जिसके बाद काफी ज्यादा हंगामा हुआ, आगजनी हुई, कई लोगों की जानें गयी. 15 नवंबर 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य का गठन किया. लेकिन अफसोस यह है कि झारखंड अलग राज्य के गठन में अहम योगदान देने वाले कोल्हान को ही झामुमो ने भुला दिया है, जहां से 14 सीट में से 12 सीट झामुमो के पास ही है.





