रांची : झारखंड में चल रही सियासी संकट के बीच लगातार विधायकों पर ही संकट के बादल गहराने लगे है. हालात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी जा सकती है जबकि उनके भाई और झामुमो से दुमका से विधायक बसंत सोरेन की विधायकी पर संकट है. इस बीच सत्ता पक्ष के ही विधायक और मंत्री मिथलेश कुमार ठाकुर भी संकट में है और उनकी विधानसभा सदस्यता खतरे में है. यहीं नहीं, प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी और समरीलाल की सदस्यता भी खत्म हो सकती है. यहीं नहीं, कांग्रेस के निलंबित विधायक इरफान अंसारी, नमन विक्सल और राजेश कच्छप भी सदस्यता गंवाने की जद में आ सकते हैं. कुल 10 विधायकों का मामला इस समय चुनाव आयोग और झारखंड विधानसभा अध्यक्ष न्यायाधिकरण में विचाराधीन है. सिर्फ देखना यह है कि कब किसकी बारी आती है. आठ विधायकों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर खनन लीज लेने का मामला है, जिसको लेकर चुनाव आयोग ने फैसला ले लिया है और कभी भी फैसला आ सकता है. वहीं बसंत सोरेन पर भी मुख्यमंत्री के भाई और झामुमो के विधायक बसंत सोरेन को लेकर भी चुनाव आयोग फैसला ले सकता है. मिथलेश कुमार ठाकुर पर भी गंभीर आरोप है और उनके खिलाफ भी चुनाव आयोग को शिकायत मिली हुई है. कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी दल बदल करने को लेकर पैसा लेने के मामले में दोषी पाये गये है और इसकी शिकायत झारखंड विधानसभा के न्यायाधीकरण में है. यहीं नहीं, कांग्रेस के दो विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को लेकर भी सुनवाई हो रही है, जो न्यायाधिकरण में सुनवाई लंबित है. दल बदल के मामले में बाबूलाल मरांडी पर झारखंड विधानसभा के न्यायाधीकरण में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिसको लेकर फैसला कभी भी संभव है. भाजपा विधायक समरीलाल पर जाति प्रमाण पत्र गलत जमा करने का आरोप है, जिस कारण उनके विधायकी पर भी तलवार लटकी हुई है. कुल मिलाकर दस विधायकों पर संकट के बादल है. 81 विधायकों वाली विधानसभा में दस विधायकों पर संकट के बादल है, जो राजनीतिक संकट की बात को बता रहा है.





