
पलामू : नावाटोली स्थित लिलिपुट अ प्ले स्कूल मे दिनांक 13 जनवरी सोमवार को लोहड़ी का त्यौहार मनाया गया। सभी बच्चे एक जगह एकत्रित हुए और लोहड़ी के गीतों पर नृत्य किया। लोहड़ी के परंपरा के अनुसार अलाव के पास बच्चों ने उसमें रेवड़ी, तिल, मकई, चूड़ा डालकर लकड़ी के ढेर पर अग्नि देकर उसकी परिक्रमा की। प्राचार्या रेणु गोयल ने बताया कि यह परिक्रमा कर हम अपनों के लिए दुआ मांगते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं। लोहड़ी का कार्यक्रम सभी मोहल्ले में मनाया जाता है। सभी नए जोड़ों (दूल्हा दुल्हन) को इस कार्यक्रम में पूरे सम्मान के साथ शामिल किया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत मनीत बग्गा ने लोहड़ी का इतिहास बताते हुए की। उन्होंने बताया की अकबर के शासनकाल के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब प्रांत का सरदार था जिसे पंजाब का नायक भी कहा जाता था। उन दिनों लड़कियों की खरीद बिक्री अमीर सौदागर करते थे तब दुल्ला भट्टी ने इसका विरोध किया और लड़कियों को सम्मान पूर्वक विवाहित जीवन जीने का अधिकार दिया। इस विजय गाथा को लोहड़ी के गीतों में गाया जाता है और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है। सभी बच्चे और शिक्षक शिक्षिकाएं पंजाब की पारंपरिक वेशभूषा मे बहुत प्यारे लग रहे थे। लोहड़ी के गानों की धुन पर सभी का थिरकने का अंदाज देखते ही बना। स्कूल के डायरेक्टर राजीव गोयल ने बताया कि हमारा मकसद सभी धर्मों के त्यौहार के बारे में जानकारी देना है। उन्होंने बच्चों को विस्तार से बताया कि यह समय किसानों के लिए सबसे उल्लास का होता है क्योंकि खेतों में अनाज लहलहाने लगते हैं। वह सबसे पहले फसलों को अग्नि को समर्पित कर भगवान से आशीर्वाद लेते हैं। इस तरह आपसी एकता बढ़ाना इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य है। कार्यक्रम की शुरुआत परंपरा के अनुसार गुरुद्वारा के हुजूरी रागी ज्ञानी हरविंदर सिंह ने अरदास करके की। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनीत बग्गा, नैना अग्रवाल, रचना जैन, अश्विनी कुमार, अंजली कुमारी,अदिति सिंह, प्रगति विशेष रूप से सक्रिय रहे। इस अवसर पर आकांक्षा, रिंकी, स्वीटी, अरीबा, नोमिता, इंदिरा, कौशल, प्रभात, सोनाली, सिमरन, उजाला, सोनल, रिम्पी, स्मृति, सिम्मी, पूजा, नाजिया, जूही, जेबा, नगमा, रितु, अंजलि, सौम्या, अभिलाषा, रानी समेत सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे।







