
रामगोपाल जेना
चक्रधरपुर : राज्य के अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाड़ंगी ने कहा कि क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा का अभी तक विकास नहीं हो पाने के पीछे झारखंड राज्य के अधिकारियों की साजिश है। श्री षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य हुए 20 साल हो गए, पर आज भी मातृभाषा की पढ़ाई से बच्चों को वंचित किया गया है। इससे बढ़कर और क्या दुखद बात क्या हो सकता है। सरकारें आई-गई पर समस्या जस की तस है। अब तक भाषाई समाधान नहीं हो पाया। जिसके चलते आज भी क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा की स्थिति विलुप्त होने के कगार पर है।
उन्होंने कहा कि चाहे उर्दू की बात हो या बांग्ला की, सबके साथ यही स्थिति है। अल्पसंख्यक आयोग की ओर से हजारों बार पत्र सरकार को लिखा गया है, पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे यह बात उभरकर आती है कि अधिकारी एक साजिश के तहत क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा का विकास नहीं चाहते हैं। क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा के स्कूलों में हिंदी भाषा के शिक्षक को पदस्थापित कर दिया जाता है या प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है, जिसके कारण पठन-पाठन नहीं हो पाता है।
श्री षाड़ंगी ने कहा कि भाषाई शिक्षकों की समस्या का समाधान यदि सही मायने में अधिकारी चाहते तो कब का इसका समाधान हो जाता। हिंदी भाषाई शिक्षकों को ओड़िया भाषा स्कूल में प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है, जिसके कारण भाषाई अध्ययन करने वाले बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यूं कहें कि पढाई हो ही नहीं पाती है।
उन्होंने कहा कि इससे यह बात उभर कर आ रही है कि अधिकारी वर्ग ही क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा का विकास नहीं चाहते हैं और वास्तविक स्थिति को सरकार के सामने यह जानबूझकर नहीं रखते हैं। इस दौरान पर ओड़िया समाज के नेता बंगाली प्रधान, जगन्नाथ प्रधान, जोगी, राजेश गोप, हरिओम अग्रवाल समेत अन्य लोग उपस्थित थे।








