
जमशेदपुर : सिखों के नए साल नानकशाही 552 वे को समर्पित कीर्तन दरबार जमशेदपुर के टेल्को गुरुद्वारा में शनिवार को शुरू हो गया. इस मौके पर हजारों लोगों ने गुरु दरबार में हाजिरी भरी और कीर्तन दरबार श्रवन किया तथा श्रद्धा के साथ लंगर ग्रहण किया. इस मौके पर अकाली दल दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष तथा तख्त श्री हरिमंदिर साहिब प्रबंधक कमेटी पटना के अध्यक्ष अवतार सिंह हित ने कहा कि नानकशाही कैलेंडर सिखों की पहचान है, जिस तरह से इस्वी, विक्रम संवत एवं हिजरी कर्म साईं साईं हिंदू एवं मुसलमानों की पहचान है वैसे ही यह हमारी पहचान है. इससे सिखों के गुरुओं का इतिहास कुर्बानी संस्कृति परंपरा रीति-रिवाज इतिहास जीवन की जानकारी मिलती है. नई पीढ़ी को इसकी जरूरत से अवगत कराया जाना चाहिए. बच्चा जब इतिहास पढ़ेगा तो उसे गुरुओं के जीवन के बारे में पता चलेगा और पंथ के प्रति उसकी श्रद्धा अटूट हो जाएगी. इससे सिख मर्यादा में रहेगा और वह अकेले अन्याय के खिलाफ डट जाएगा. वही लखबीर सिंह कोमल के ढाडी जत्थे ने पंडित कृपाराम के गुरु तेग बहादुर की शरण में आने एवं हिंदू धर्म को बचाने के लिए बलिदान देने की घटना को वीर रस में परोसा. कथा वाचक भाई सुखदेव सिंह ने भी नए साल के महत्व को दर्शाया. इस मौके पर सरदार अवतार सिंह हित तथा तखत श्री हरिमंदिर साहब प्रबंधन कमेटी के उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह एवं अन्य को सिरोपा एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया. इस मौके पर गुरदीप सिंह, प्रधान गुरमीत सिंह, सुरजीत सिंह, झारखंड सिख प्रतिनिधि बोर्ड के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बिल्ला, कवि सर जसवीर सिंह, मत्तेवाल राम, किशन सिंह, रविंदर सिंह, सुखदेव सिंह खालसा, सतनाम सिंह सोहल, मोहन सिंह भाटिया, दमनप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह आदि सक्रिय रहे.
हम हिंदू नहीं परंतु पक्के हिंदुस्तानी : हित
शिरोमणी अकाली दल दिल्ली के दीर्घकालीन प्रधान रहे सरदार अवतार सिंह ने कहा कि सिख हिंदू नहीं है परंतु पक्के हिंदुस्तानी हैं. सिख सच्चे भारतीय हैं. हिंदुस्तान का प्रत्येक नागरिक इसका वारिस है. दिल्ली एवं देश के अन्य हिस्सों में सीएए के नाम पर हो रहे बवाल को बेवकूफी बताते हुए कहा कि बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक उन्हें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए. जब देश की आजादी की लड़ाई हमने लड़ी थी तब हमने हिंदू मुसलमान सिख या ईसाई बनकर नहीं लड़ी थी. तब हम हिंदुस्तानी थे और आज भी हमें हिंदुस्तानी बनने एवं वफादारी दिखाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान से सिखों को निकाला गया और अकाली दल नागरिकता की मांग करती रही . अकाली दल सीएए का समर्थन करता है परंतु इसके धर्म शब्द पर संशोधन का आग्रह भी प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री से किया है. उन्होंने बताया कि पटना तख्त लिए नया एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसमें पूर्वोत्तर भारत एवं ओड़िशा को भी हिस्सेदारी देने के पक्षधर हैं और एक्ट निर्माण के लिए सभी तख्तों के संविधान का अध्ययन हो रहा है. वहीं उन्होंने सिखों से आग्रह किया कि व्यापक के सच्चे सिख बने और गुरुद्वारा के प्रधान पद के लिए लड़ाई नहीं करें। यदि प्रधान पद के लिए लड़ाई करनी है तो वे गुरुद्वारे से हट जाए. गुरुद्वारे में राजनीति एवं ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं है।सेवा में संघर्ष या का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि केंद्रीय लीडरशिप झारखंड में इसकी इकाई गठन करने की प्रक्रिया में है.















