
राजन सिंह
चाकुलिया : देश की आजादी के बाद और झारखंड राज्य मिलने के बावजूद भी झारखंड में निवास करने वाले आदिम जनजाति (सबर) परिवार आज भी बदहाली की जिंदगी जीने पर विवश हैं. चाकुलिया प्रखंड की चालुनिया पंचायत के भंडारू गांव के आमडांगा सबर टोला में रह रहे छह सबर परिवार जन प्रतिनिधि और सरकारी पदाधिकारियों की उपेक्षा के कारण जिल्लत भरा जीवन जीवन जिने के लिए बाध्य हैं. आज जहां देश में डिजिटल इंडिया की बात हो रही है, लोग चांद पर चले गए, दुनिया इंटरनेट से जुड़ गई है, वहीं भंडारू गांव के आमडांगा सबर टोला के छह सबर परिवार ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. टोला के सबर परिवार की जीवन शैली पर बॉलीवुड फिल्म ‘सड़क’ की गीत ‘रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं, अपना खुदा है रखवाला अब तक उसी ने है पाला …’ चरितार्थ है . टोला जाने के लिए सड़क नही है, रहने के लिए घर नही है, जर्जर झोपड़ी में रहने पर विवश हैं. पीने के लिए स्वच्छ पानी नही हैं, बिजली भी नहीं है. सबर परिवार झोपड़ी में किसी तरह अपना जीवन काट रहे हैं. उन्हें बरसात के दिनों में बैठकर रात गुजारनी पड़ती है. टोला निवासी नंद सबर, कृष्णा सबर, भारती सबर, पानो सबर ने बताया कि वे सभी विगत 25 वर्ष से खाल किनारे झोपड़ी बनाकर भंडारू के आमडांगा सबर टोला में रह रहे हैं. अब तक उनके बीच न तो कोई जन प्रतिनिधि पहुंचे हैं और न ही कोई पदाधिकारी आये हैं. उपेक्षा के कारण उनका विकास नहीं हुआ है. टोला तक आने जाने के लिए सड़क नहीं है. सभी खाल किनारे खेत की पगडंडी होकर आना जाना करते हैं.
सभी परिवार पीते हैं खाल का पानी
सबरों ने बताया कि टोला में वर्षो पूर्व एक कुआं बनाया गया था, जो अब ध्वस्त हो चुका है. टोला में चापाकल भी नहीं है. टोला के सभी छह सबर परिवार की कुल जनसंख्या 40 है. सभी विगत 24 वर्षों से पीने के लिए पूर्ण रूप से खाल पर निर्भर हैं. सबरो ने बताया कि खाल किनारे गड्डा खोदकर पीने के लिए पानी लाते है. बरसात के दिनों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

छह सबर परिवार में एक का बना है राशन कार्ड
टोला में रह रहे सबरों ने बताया कि छह सबर परिवार में एक सबर परिवार का राशन कार्ड बना है. बाकी सबर राशन कार्ड से वंचित हैं. सबरों ने कहा कि लॉकडाउन में एक बार सभी को 10-10 किलो कर चावल मिला. उसके बाद उन्हें चावल नहीं मिला है. सबरों ने कहा कि लॉकडाउन होने से उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पहले वे जंगल से लकड़ी काटकर बाजार में बेच कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, परंतु लॉकडाउन होने के बाद वे अब लकड़ी भी नही बेच पा रहे हैं और न ही कहीं मजदूरी मिल रही है. ऐसे में वे सभी जंगल से साग, छातु चुन कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं.
लॉकडाउन में कुचिया मछली पकड़ कर खा रहे हैं
सबरों ने कहा कि लॉकडाउन में सबर परिवार खाल से कुचिया मछली (जल केंचुआ) खा रहे हैं. सबरों ने कहा कि यह मछली स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है.
पीते हैं खाल का पानी इसकी जानकारी नहीं जल्द उचित पहल करेंगे : विधायक
इस संबंध में विधायक समीर महंती ने कहा कि इतनी परेशानियों के बीच जीने पर मजबूर सबर परिवार के बीच जाकर वे यथासंभव सहयोग करेंगे. लॉकडाउन में जहां से भी सूचना मिली अपने स्तर पर सहयोग किया है. श्री महंती ने कहा कि वे भंडारू के आमडांगा टोला पहुंचकर सबर परिवारों की मदद करेंगे.







