
चाईबासा : एक ओर जहां कोल्हान के पश्चिमी सिंहभूम जिला के सारंडा क्षेत्र में लौह आयस्क का कालाबाजारी करने वाले आयरन माफियाओं के बिरूद्व कार्रवाई करने के लिए वन विभाग कमर कस ली हे वहीं हाथियों के दांत निकालने वाले तस्करों पर भी कार्रवाई करने के लिए तैयारी की गई है। कोल्हान के पश्चिमी सिंहभूम की सीमा से सटे ओडिशा राज्य के क्योंझर में दो हाथियों की करंट लगाकर हत्या करने व दांत काटकर ले जाने के बाद वन विभाग चिंता में पड़ गया है। यही वजह है कि खासकर हाथियों की सुरक्षा और हाथी दांत तस्करों पर अंकुश लगाने के लिए सारंडा और राउरकेला की वन प्रमंडल की टीम अब मिलकर काम करेगी। सोमवार को राउरकेला वन विश्राामागार में सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी रजनीश कुमार और राउरकेला वन प्रमंडल पदाधिकारी संजय सवंई की इंटर स्टेट ज्वाइंट बॉर्डर कॉर्डिनेशन एक्टिविटी पर वार्ता हुई। इस अवसर पर दोनों वन प्रमंडल पदाधिकारियों की बीच हाथियों के आवागमन पर चर्चा हुई। तय हुआ कि दोनों प्रमंडल हाथियों की आवागमन व गतिविधियों की सूचना का आदान प्रदान करेंगे। साथ ही राज्यों की सीमा पर हाथियों को तस्करो से बचाने के लिए दोनों प्रमंडलों के अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा गश्ती की जाएगी। चूंकि अभी लॉकडाउन की स्थिति है। इस कारण अब जंगली जानवर भी आसानी से दिखने लगे हैं। उनका कोई शिकार ना करे, इसके लिए दोनों प्रमंडलों के सूचना तंत्रों को मजबूत किया जाय। यह भी तय हुआ कि पिछले कुछ माह में हाथियों की मौत के बाद तस्करों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ज्यादा से ज्यादा गश्ती की जाए ताकि तस्करों से जानवरों को बचाया जा सके। सारंडा में कारो-करमपदा व आंकुआ-अंबिया हाथी कॉरिडोर में बढ़ेगी गश्ती। सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी रजनीश कुमार ने बताया कि सारंडा में दो हाथी कॉरिडोर हैं।कारो-करमपदा हाथी कॉरिडोर व आंकुआ- अंबिया हाथी कॉरिडोर। मनोहरपुर वन विश्रामागार में भी वन क्षेत्र पदाधिकारी गुआ, कोइना व समता के साथ वन प्रमंडल पदाधिकारी की बैठक हुई। इसमें हाथियों की सभी गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को त्वरित सूचना उपलब्ध कराने के लिए बोला गया है।






