
जमशेदपुर : सवर्ण महासंघ फाउंडेशन के राष्ट्रीय महामंत्री एवं भाजपा नेता डीडी त्रिपाठी ने सोमवार को हुई राष्ट्रीय कोर कमिटी की वेबिनार के बाद बताया कि राष्ट्रीय सवर्ण माह संघ फाउंडेशन बिहार के सेनारी नरसंहार के पीड़ितों को न्याय एवं सम्मान दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अलग से याचिका दायर करेगा. ज्ञात हो कि 1999 में जिस विभत्सता के साथ घर से निकलकर पहले पेट को चीरा गया था और फिर सिर काटकर 34 लोगों की हत्या कर दी गई थी, उनके सारे दोषियों को पटना उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव का रोना रोते हुए बरी कर दिया था. 22 वर्षों के लंबी अवधि के बाद आये इस निर्णय ने सवर्ण समाज को झकझोर कर रख दिया हैं जबकि मरने वालों में पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार के परिवार के भी 6 सदस्य शामिल थे जिनकी लाशें देख हृदयाघात से उनकी भी मृत्य हो गई थी. श्री त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय कोर कमिटी की बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ कि सवर्ण महासंघ फाउंडेशन इस मामले में अपनी भूमिका से पीछे नहीं हटेगा क्योंकि ये जब हत्यायें हुई थी उस समय बिहार में सामाजिक न्याय के नाम पर चलने वाली कुत्सित मानसिकता की सरकार लालू यादव की थी जिसने दोषियों को सजा दिलाने की जगह व्यवस्था को वोट की राजनीति के तहत उन्हें बचाने का प्रयास ज्यादा किया और यही कारण है कि निचली अदालत से मृत्यदंड पाए गए अपराधी भी बाईज्जत बरी हो गए. जो भारतीय न्याय प्रणाली पर कलंक हैं जबकि सारे नामजद लोगों के खिलाफ उस हत्याकांड में बच गए प्रत्यक्षदर्शी राकेश शर्मा एवं संजय सिंह ने अदालत में अपराधियों की पहचान की थी, जिनकी अपराधियों ने उस हत्याकांड में पेट चीर दिया था और मरा हुआ जानकर छोड़ दिया था. भले ही 1999 में हुई इस जघन्य हत्याकांड ने देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया हो, लेकिन आज जिस तरह से न्यायालय, प्रशासन और सत्ता की भूमिका ने इस जघन्य हत्या कांड पर धूल डाला हैं, वो सवर्णों के लिए इस देश में विचारणीय विषय हैं. श्री त्रिपाठी ने नीतीश सरकार के सुप्रीम कोर्ट में अपील की पहल का स्वागत किया हैं किन्तु सवर्ण समाज को अब विश्वास नहीं रह गया है कि वर्तमान व्यवस्था से उन्हें न्याय मिल पायेगा. मीटिंग में टेक्सस अमेरिका से अंतराष्ट्रीय संयोजक डॉ दिनेश पुरोहित, राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेंद्र मणि त्रिपाठी, राष्ट्रीय संयोजक ओमप्रकाश सिंह, राष्ट्रीय सलाहकार डॉ तोषेन्द्र द्विवेदी , महामंत्री करन पाल सिंह, राष्ट्रीय प्रचारक अभय ओझा, ज्योत्सना जैन, रश्मि त्रिवेदी, संगीता जोशी, तरुण कुमार शर्मा, निहाल सिंह, ललित मोहन राणा, संतोष राज पुरोहित सहित 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल थे.




