
नई दिल्ली : केंद्र मंत्रिमंडल ने बुधवार को दो बड़े विधेयक को मंजूरी दी है. इसमें पहला विधेयक लड़कियों के विवाह की उम्र सीमा को 18 की जगह 21 वर्ष से जुड़ा है और दूसरी वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का है. कैबिनेट ने लड़कों की तरह लड़कियों की विवाह की न्यूनतम उम्र को भी 21 वर्ष करने की मंजूरी दी है. इस विधेयक को केंद्र से मंजूरी मिल गयी है, जिसके बाद इसे शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. शीतकालीन में पेश होने के बाद इसे कानूनी तौर पर लागू किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने लाल किले पर पर 2020 में संबोधन के समय न्यूनतम उम्र को एक समान करने की घोषणा की थी. वहीं यूनीसेफ के अनुसार भारत में हर साल 15 लाख लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में होती है.
टास्क फोर्स ने की थी पहल-
लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु पर विचार के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया था. महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा जून 2020 में गठित टास्क फोर्स में नीति आयोग के डॉ. वीके पॉल और डब्ल्यूसीडी, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों भी शामिल थे. इसमें इन्होंने सिफारिश कि थी कि निर्णय की सामाजिक स्वीकृति को प्रोत्साहित करने के लिए एक व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए. इसने दूर-दराज के क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों के मामले में परिवहन सहित लड़कियों के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक पहुंच की भी मांग की है.
1978 में टास्क फोर्स ने किया था संसोधन-
टास्क फोर्स ने 1978 में संशोधन किया था. जिसके तहत 1929 में शारदा एक्ट में न्यूनतम उम्र 15 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष की गयी थी.





