
रांची : झारखंड राज्य में बार एवं रेस्त्रां संचालन करने वालो के लिए आगामी वित्तीय वर्ष (2022-2023) काफी दुखदाई होने वाला है, जैसा कि ज्ञात हुआ है राज्य सरकार नई उत्पाद नीति लागू करने वाली है, जिसमें छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की उत्पाद नीति का अध्ययन करके उसी प्रारूप में छत्तीसगढ़ी मॉडल झारखंड में भी लागू करने की योजना है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की ओर से नियुक्त परामर्शी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ने झारखंड राज्य सरकार को उत्पाद राजस्व संवर्द्धन के विषय पर कई सुझाव उपलब्ध कराये हैं. सरकार की इस कवायद से बार संचालकों की हालत खराब है, अगर यह सुझाव राज्य सरकार अमल में लाती है तो राज्य के 80 फीसदी से ज्यादा बार बंद होने के कगार पर होंगे. इसके लिए मसौदा तैयार कर दिया गया है. करीब 190 पन्नों की यह रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, जिस पर युद्धस्तर पर विभाग में काम चल रहा है. अगर इस रिपोर्ट को माने और इसके अनुसार चलें तो इस बार जनसंख्या के आधार पर बार अनुज्ञप्ति शुल्क (वार्षिक लाइसेंस शुल्क) लगाने की सिफारिश की गई है. अगर जनसंख्या किसी शहर की 1 लाख है तो उसकी अनुज्ञप्ति शुल्क कुछ और होगी और किसी जिले की जनसंख्या 3 लाख से अधिक है तो वहां के बार अनुज्ञप्ति शुल्क कुछ और ही होगी. रिपोर्ट की मानें तो तीन लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले जिले या शहर में बार लाइसेंस शुल्क जो वर्तमान में 9 लाख वार्षिक है, उसे 24 लाख प्रति वर्ष करने की सिफारिश की गई है. वहीं मॉल में स्थित बार के लिए शुल्क थोड़ी और अधिक 31 लाख होगी. इसके अलावा बार व्यवसायियों को हर महीने शराब के उठाव का कोटा भी बांधने की सिफारिश की गई है. सोमवार को इस नीति के विरोध में झारखंड बार एवं रेस्त्रां एसोसिएशन ने रांची के प्रेस क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की, जिसमें संघ के अध्यक्ष रंजन कुमार ने इस संबंध में कहा कि सिर्फ राजस्व को न देखे सरकार, बल्कि इससे लोगो को मिल रहे रोजगार को भी देखे. एक बार रेस्त्रां खुलता या चलता है तो सैकड़ों लोगों को रोजगार और आमदनी होती है. वो चाहे कर्मचारी हो, दूध वाला हो, पनीर, मटन, चिकन, सब्जी, गैस या रिक्शा या टेंपो वाला, हर कोई कही न कही जुड़ा है और लाभान्वित होता है. बार व्यवसाय तो पहले ही मरा है यहां, उसे मत मारिए अब. अगर सरकार यह अप्रत्याशित वृद्धि करती है तो आगामी 1 अप्रैल से राज्य के सभी बार खुद बार को बंद कर देंगे. झारखंड बार एवं रेस्त्रां संघ के प्रवक्ता अनित सिंह का कहना है कि 9 लाख से 24 या 31 लाख लाइसेंस शुल्क करने की तैयारी पूरी तरह से गलत फैसला है. सरकार को उद्यमी को बढ़ावा देना चाहिए, व्यापार के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, पर हमारी सरकार रोजगार धंधे को बंद करने की तैयारी में है. पिछले 3 वर्षों की बात करें तो कोरोना के कारण यह उद्योग हमारे राज्य में बिल्कुल खस्ताहाल में है. तीनों लहरों में बार करीब डेढ़ साल से ज्यादा बंद रहे हैं, वही खुलने के बाद भी यहां दर्जनों तरह की पाबंदियां रही हैं जिससे लोगो का आगमन कम रहा और संचालक किसी प्रकार व्यवसाय चला अपने और अपने कर्मचारियों के घरों को चलाते रहे और चलाते आ रहे. इन लोगों ने कहा है कि इस कारण गर यह नीति आ रही तो यह व्यवसाय को मारने के लिए लायी जा रही है. संघ के सचिव सुबोध जायसवाल ने कहा कि फीस बढ़ोतरी से बार व्यवसाय बंद हो जाएंगे, जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी, अगर कोई बार लाइसेंस लेता भी है तो उसे कई गुना रेट बढ़ाना होगा जिससे बिक्री पर असर होगा. पीने वाले सड़को पर, ढाबे में, कार में बैठ कर पिएंगे, जिससे राजस्व हानि के साथ एक्सिडेंट और क्राइम बढ़ेगी. हम सभी राज्य के बार संचालक बंद करना पसंद करेंगे पर वृद्धि के साथ व्यवसाय नही करेंगे. संघ के संरक्षक गुरचरण सिंह ने कहा कि बार के फीस बढ़ाने और कोटा के निर्धारण से बार नही चल पाएंगे. विभाग का नाम उत्पाद एवं मद्य निषेध है, पर विभाग तो राजस्व के नाम पर शराब को बढ़ावा दे रही जो सरासर ग़लत है. प्रेस कांफ्रेंस में संघ के कोषाध्यक्ष बिरेन साहू, सलाहकार रामाशंकर सिंह, संरक्षक विजय वर्मा समेत रांची, धनबाद, जमशेदपुर और अन्य जिलों के बार संचालक मौजूद थे.







