जमशेदपुर : झारखंड और विशेष कर कोल्हान में शिलापट्ट में नाम शामिल कराने को लेकर सियासती घमासान मचा हुआ है. नाम महत्वपूर्ण है, काम भले कैसा भी हो, इससे किसी को लेना- देना नहीं. वहीं इसमें प्रभावित नेताओं का कोपभाजन बनना पड़ता है विभागीय अधिकारियों को. यहां तक कि जन प्रतिनिधि तो जन प्रतिनिधि, उनके रिश्तेदार भी अब सरकारी अधिकारियों की क्लास लगाने लगे हैं.(नीचे भी पढ़ें)

आपको याद दिलाते चलें कि विगत दिनों सरायकेला-खरसावां जिले से यह विवाद शुरू हुआ था, जहां एक शिलापट्ट में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का नाम छोटा लिखे होने को लेकर भाजपाई भड़क उठे थे. उसके बाद शिलान्यास करने पहुंचे खरसावां विधायक दशरथ गागराई के साथ धक्का-मुक्की तक हो गई थी. दूसरा विवाद जमशेदपुर में तब हुआ था, जब मानगो चौक में खुदीराम बोस की प्रतिमा के अनावरण एवं निशान साहेब स्थल के सौंदर्यीकरण का उद्घाटन करने पहुंचे स्थानीय विधायक सह राज्य के मंत्री बन्ना गुप्ता को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. यहां भी भाजपाइयों ने जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो के अपमान का आरोप लगाते हुए खूब बवाल काटा था. (नीचे भी पढ़ें)

तीसरा विवाद शनिवर को करनडीह में सामने आया जहां जमशेदपुर- हाता एवं राजनगर-जुगसलाई मार्ग की मरम्मत कार्य के शिलान्यास में सांसद विद्युत वरण महतो अपना नाम नीचे लिखे जाने पर भड़क उठे और विभागीय अधिकारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई. इतना ही नहीं, सांसद शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिये बिना ही लौट गए. वहीं स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने विभागीय अधिकारी की जमकर क्लास लगाई. और तो और, जिला परिषद सदस्य के रिश्तेदार ने भी विभागीय अधिकारी की खूब क्लास लगाई. (नीचे भी पढ़ें)
बेचारा विभागीय अधिकारी करे तो क्या करे. बता दें कि कुल 9.14 किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत का कार्य किया जाना है, जिस पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. सड़क अभी बननी शुरू भी नहीं हुई है कि नाम को लेकर हाय-तौबा मचना शुरू हो गया है. वैसे झारखंड के लिए यह कोई पहला मामला नहीं है. इस कोहराम के बीच विधायक संजीव सरदार ने शिलान्यास किया और चलते बने.












