गालूडीह : प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में मृत पशुओं के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण आज भी मृत पशुओं को नेशनल हाइवे के किनारे खुले स्थान पर फेंक दिया जाता है. मरे हुए पशुओं को खाने से खास कर कुत्तों को कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं. इस स्थिति में ये कुत्ते लोगों के लिए और खतरनाक हो जाते हैं. आवारा पशु व घरों में पाले जाने वाले मवेशियों के मृत शरीर को ठिकाने लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है. पहले मरे पशुओं को गांवों के बाहरी हिस्से में फेंक दिया जाता था. वही परंपरा आज भी जारी है. गांवों के चारों तरफ घनी बस्तियां बस जाने के बाद अब नेशनल हाइवे के किनारे खाली जगह ढूंढ़कर मृत पशुओं को फेंक दिया जाता है. जिनसे सड़ने और उनसे आती दुर्गंध के कारण वातावरण प्रदूषित होता रहता है. यही नहीं दुर्गंध के कारण उधर से गुजरनेवालों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. संक्रमण के कारण मृत पशु कई बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं.



