रामगोपाल जेना/चाईबासा : चाईबासा स्थित आदिवासी हो समाज महासभा भवन में शुक्रवार को आदिवासी हो समाज की एक आपात बैठक आयोजित हुई. बैठक में अंतरजातीय एवं दूसरे धर्मों के माननेवालों के अतिक्रमण पर चर्चा हुई. (नीचे भी पढ़ें)
आदिवासी हो समाज महासभा के उपाध्यक्ष कृष्ण चन्द्र बिरुली की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समाज के गणमान्य लोगों एवं तीनों हो समाज के संगठनों के लोगों ने हिस्सा लिया. बैठक में अंर्तजातीय एवं दूसरे धर्मावलंबी लोगों से शादी-विवाह के परिणामों पर विचार हुआ. हो समाज महासभा के केन्द्रीय महासचिव यदुनाथ तियु ने तीन अति ज्वलंत मुद्दे बैठक में रखे, जिनमें पीछे हुए एक एवं आगे होने जा रही तीन अंतरजातीय शादियों में हो रीति-रिवाज अपनाये जाने का उल्लेख करते हुए इसका विरोध किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
बैठक में केन्द्रीय महासचिव यदुनाथ तियु ने बताया कि पूर्व में हुए शादी और वर्त्तमान में होने वाली दोनो शादियां दूसरे धर्मावलंबी लड़कों के साथ शादियां होने की बात बताई, जिस पर आदिवासी हो समाज महासभा केन्द्रीय समिति, आदिवासी हो समाज महासभा सेवा निवृत्त संगठन एवं आदिवासी हो समाज महासभा, युवा महासभा ने तीनों शादियों की निंदा करने हुए इस पर आपति जतायी. वक्ताओं ने कहा कि चूंकि लड़कियां बालिग हैं एव शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं, उनके क्रिश्च्यन रीति से चर्च या कोर्ट में शादी कराने पर समाज को कोई अपत्ति नहीं . लेकिन निमंत्रण देकर हो समाज के लोगों को साक्षी या गवाह बनाना, आशीर्वाद दिलाना, प्रीतिभोज आदि के माध्यम से इस तरह की शादी को सामाजिक मान्यता दिलाना हो समाज को स्वीकार नहीं है, इसे कभी माफ नहीं किया जायेगा. इन तीनों शादियों वाले परिवारों को उनकी शादी का रूप बदलने का अनुरोध किया गया है. सभा में उपस्थित लोगों ने ऐसी शादियों का प्रचलन यथाशीघ्र रोकने के लिए जन-जन तक मुद्दे को पहुंचाने का अनुरोध किया. (नीचे भी पढ़ें)
बैठक में समाज के लोगों से भी ऐसी शादियों का बहिष्कार करने का आग्रह किया गया. भविष्य में ऐसी शादियों को बढ़ावा देने वालों पर कठोर दंड लगाने का फैसला लिया गया. बैठक में कृष्ण चन्द्र बिरुली, चैतन्य कुंकल, रामाय पुर्ती, उमा शंकर पाड़ेया, रामबली सिंकू, रामेश्वर सवैयां, मानसिंह सामड, चन्द्रमोहन बिरुआ, हरिचरन हाईबुरू, जगमोहन बानरा, शांति सिद्दू, विजय सिंह सुम्बरूई, इपिल सामड, गब्बर सिंह हेम्ब्रम, रवि बिरुली तथा समाज के कई लोग उपास्थित थे.




