रामगोपाल जेना/चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी ने झारखण्ड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन विधेयक पर झारखंड सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि व्यापारियों के हितों एवं जनता पर अनावश्यक महंगाई की मार न पड़े. जिला कांग्रेस कमेटी चेंबर ऑफ कॉमर्स की जायज मांगों के साथ है. कांग्रेसियों ने यहां अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्यपाल ने विधेयक को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है, यानी कि राज्यपाल को भी संशय है इस बिल पर. पूरे झारखंड में खाद्यान्न, आलू ,प्याज ,फल – सब्जियों का कारोबार ठप हो रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
राज्य के 24 जिलों में 28 खाद्यान्न मंडियों की थोक दुकानें बंद हैं. इसका सीधा असर राज्य की जनता पर पड़ेगा. महंगाई बढ़ेगी, जमाखोरी बढ़ेगी. ऐसे में 4-5 दिनों के बाद राज्य में खाद्यान्न फल और सब्जी की कमी महसूस की जाएगी. ऐसे में जिला कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से मांग करेगी कि जब जीएसटी लिया जा रहा है तो अतिरिक्त 2% कर लगाने का कोई तर्क नहीं दिखता. एडीशनल टैक्स से महंगाई बढ़ेगी और अंततः राज्य के लोगों को नुकसान होगा. इससे औद्योगिक प्रतिष्ठान तो हतोत्साहित होंगे ही, जो चावल दाल की मिलें हैं या जो बड़े कारोबारी हैं, वे राज्य छोड़ सकते हैं. इससे झारखंड के अंदर कारोबारी माहौल बिगड़ेगा. ऐसे में कांग्रेस ने हेमंत सोरेन सरकार से अतिरिक्त दो फीसदी टैक्स को जनहित में वापस लिये जाने की मांग करती है ताकि झारखंड के व्यापारियों और यहां के निवासियों को राहत मिले. (नीचे भी पढ़ें)
प्रतिक्रिया व्यक्त करने वालों में कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर दास, सांसद प्रतिनिधि त्रिशानु राय, जितेंद्र नाथ ओझा, राकेश कुमार सिंह, ओबीसी प्रकोष्ठ वरीय उपाध्यक्ष रंजीत यादव, वरीय कांग्रेसी रवींद्र बिरुआ, संतोष सिन्हा, सुशील कुमार दास, राजू करुआ आदि शामिल हैं.



