गालूडीह: दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान कृषि केन्द्र में शनिवार को खरीफ फसल को लेकर वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सहायक निदेशक अनुसंधान डॉ पीके सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक का उद्घाटन केंद्र के सहायक निदेशक डॉ नजरुल सलाम और वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान वैज्ञानिकों ने अपने द्वारा वर्ष 2022-2023 में खरीफ फसल पर किये गए अनुसंधान के फलाफल विस्तृत समीक्षा की. (नीचे भी पढ़े)
साथ ही वर्ष 2023-2024 में खरीफ फसल पर किये जाने वाले अनुसंधान कार्यों पर विस्तृत जानकारी दी. केन्द्र के वैज्ञानिकों से जानकारी लेने के बाद बैठक में उपस्थित मुख्य अतिथि डॉ पीके सिंह ने कहा कि खरीफ फसल से ही किसान स्वावलंबी हो पाएंगे. वैज्ञानिक स्थल भ्रमण कर किसान को खेती कार्य का अवलोकन करें. केन्द्र में किया गया अनुसंधान से किसान को अवगत कराएं, ताकि किसान खरीफ फसल पर ध्यान केंद्रित कर ज्यादा से ज्यादा खेती कार्य कर सके.(नीचे भी पढ़े)
बैठक में मड़ुआ फसल पर विशेष चर्चा
वैज्ञानिकों ने बैठक में मड़ुआ फसल पर विशेष चर्चा की. बताया कि मोटा अनाज बंजर और असिंचित भूमि पर आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी खेती बेहद कम पानी में भी हो सकती है. सुखाड़ की आशका में धान की जगह वैकल्पिक फसल के रूप में इसका इस्तेमाल हो सकता है. यह लोगों की इम्युनिटी को बढ़ाता है. बदलते समय में खान-पान का तरीका बदल गया है.(नीचे भी पढ़े)
बता दें कि कभी गरीबों का आहार कहा जाने वाला यह मोटा अनाज आज संपन्न घरानों की थाली का खास व्यंजन हो गया है. बैठक में डॉ नजरुल सलाम, डॉ डीके शाही, डॉ रमेश कुमार, डॉ अशोक सिंह, डॉ सीएस महतो, डॉ प्रमोद राय, डॉ आरती बीना एक्का, एसएस कुमार, डॉ डी रजक, डॉ देवाशीष महतो, बिनोद कुमार, आदित्य रावत, जगन्नाथ महतो आदि उपस्थित थे.



