अनिल कुमार/ बोकारो : जल ही जीवन है यह कहावत कही जाती है जो हकीकत भी है. जल न हो तो दुनिया में कोई जिंदा नहीं रह पाएगा. अगर पुराने जमाने की बात करें तो नदी, तालाब, कुएं ही पेयजल के साधन थे. नदी, तालाब, कुओं पर ही लोगों का जीवन निर्भर होता था, मगर आज हर घर नल जल की योजना चलाकर लोगों के घर तक पानी पहुंचाने की बात कही जाती है, मगर बोकारो जिले के फुसरो नगर परिषद अंतर्गत सीसीएल डोरी क्षेत्र में कारीपानी एक ऐसा गांव है जहां आज भी लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
गांव के लोगों को हर रोज गंदे नाले के किनारे गड्ढा खोदकर चुआं बनाकर उसका पानी छान कर पीना एवं अन्य उपयोग में लाना पड़ता है. बताते चलें दें कि यह गांव फुसरो नगर परिषद के वार्ड नंबर 9 के अंतर्गत आता है, जहां के लोग वर्षों से इसी तरह चुएं के पानी से अपनी प्यास बुझाते आ रहे हैं. गांव के लोग सुबह से ही अपने बरतन-भांडे लेकर चुआं पर पानी लेने पहुंच जाते हैं और अपनी बारी आने पर ही लोग इस चुएं से पानी निकाल कर उसे छानकर अपने बरतनों में भरकर घर ले जाते हैं. यही पानी वे पीने एवं खाना बनाने के लिए भी प्रयोग में लाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में एकाध कुएं भी हैं जो जल स्रोत नीचे चले जाने के कारण अभी सूख गये हैं. हालांकि पानी रहने पर भी उनका पानी इस्तेमाल के लायक नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय वार्ड पार्षद से लेकर अन्य जन प्रतिनिधियों तक भी अपनी समस्या को लेकर कई बार गुहार लगाई, किन्तु उन्हें आज तक स्वच्छ पानी नसीब नहीं हुआ. (नीचे भी पढ़ें)
लगभग 5000 की आबादी वाला यह क्षेत्र इस चुएं के पानी पर ही निर्भर हैं जहां लोगों को अपनी बारी आने का घंटों इंतजार करना पड़ता है. वहीं इस संबंध में निवर्तमान वार्ड पार्षद ने पूछने पर पूर्व पार्षद ने कहा कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर परिषद से लेकर विधायक तक को पत्र लिखा, मगर बार-बार डीपीआर तैयार नहीं होने की बात कही जाती है. हालांकि सीसीएल ढोरी क्षेत्र मैं कुछ दूर तक पाइप लाइन के द्वारा पानी दिया जाता है लेकिन वह पानी भी फिल्टर नहीं होती. दामोदर नदी से रॉ वाटर की सप्लाई होती है, मगर वार्ड नंबर 9 के लोगों को वह भी नसीब नहीं है.



