सरायकेला : सरायकेला जिले में शनिवार को जिला स्तरीय निरीक्षण दल ने दलभंगा स्थित पूनम क्लिनिक पर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत छापामारी की. यह कार्रवाई उपायुक्त के निर्देश पर कुचाई अंचलाधिकारी के नेतृत्व में हुई. निरीक्षण दल में जिला नोडल पदाधिकारी अनिर्वन महतो और सहायक धनपत महतो शामिल थे. जांच के दौरान पाया गया कि परमानंद महतो पिछले 20 वर्षों से बिना किसी वैध पंजीयन या अनुमति के क्लिनिक का संचालन कर रहे थे. टीम द्वारा जब क्लिनिक संचालक से चिकित्सीय योग्यता प्रमाणपत्र और आवश्यक लाइसेंस की मांग की गई, तो वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके. निरीक्षण के दौरान वहां से बिना अनुमति के रखी गई विभिन्न दवाएं और जले हुए जैव अपशिष्ट (बायो-मेडिकल वेस्ट) भी बरामद किए गए, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है. (नीचे भी पढ़ें)
निरीक्षण दल ने सभी अनियमितताओं को देखते हुए क्लिनिक को अवैध संचालन के आरोप में तत्काल प्रभाव से सील कर दिया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीयन या चिकित्सीय योग्यता के चिकित्सा सेवा प्रदान करना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि दलभंगा और आसपास के इलाकों में लंबे समय से अवैध बालू खनन और तस्करी का गोरखधंधा भी जोर-शोर से चल रहा है. ग्रामीणों के बार-बार विरोध के बावजूद बालू माफिया बेखौफ होकर धंधा जारी रखे हुए हैं. लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस और खनन विभाग की उदासीनता के कारण इन माफियों के हौसले बुलंद हैं. (नीचे भी पढ़ें)
ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा पूनम क्लिनिक पर की गई यह कार्रवाई सराहनीय कदम है, परंतु इसी तरह अवैध बालू खनन के खिलाफ भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि कानून का शासन कायम रह सके. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गांवों में बिना अनुमति के चल रहे क्लिनिक और अवैध व्यवसायों पर निगरानी कब सख्त होगी. प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसे संस्थानों में लगातार जांच अभियान चलाया जाएगा.



