लंदन/रांची : झारखंड @25 वैश्विक आउटरीच के तहत यूनाइटेड किंगडम प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक इंग्लैंड यूके की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु उत्तरदायी सार्वजनिक संस्था के साथ बैठक की. बैठक का उद्देश्य विरासत संरक्षण, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना रहा. बैठक के दौरान मेगालिथ, मोनोलिथ, प्रागैतिहासिक परिदृश्य एवं जीवाश्म पार्कों के संरक्षण से जुड़ी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, वैज्ञानिक प्रलेखन, संरक्षण योजना, व्याख्या तथा समुदाय-आधारित विरासत प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा हुई. इस अवसर पर हिस्टारिक इंग्लैंड द्वारा मुख्यमंत्री को शनिवार को एवेबरी और स्टोनहेंज जैसे विश्व-प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थलों के भ्रमण हेतु विशेष आमंत्रण भी दिया गया. यह बैठक यूके भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम 2025 के संदर्भ में आयोजित हुआ, जो विरासत संरक्षण, संग्रहालय, पुरातत्व, क्षमता निर्माण, अनुसंधान आदान-प्रदान, प्रलेखन और जन सहभागिता के लिए एक संरचित द्विपक्षीय ढांचा प्रदान करता है. (नीचे भी पढ़ें)
यह कार्यक्रम भारतीय एवं ब्रिटिश विरासत संस्थानों के बीच संस्थागत साझेदारी, विशेषज्ञ आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को सक्षम बनाता है. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो इस द्विपक्षीय ढांचे का उपयोग कर अपनी प्राचीन एवं आदिवासी विरासत के संरक्षण और वैश्विक पहचान को सुदृढ़ कर रहा है. उन्होंने रेखांकित किया कि झारखंड उन चुनिंदा क्षेत्रों में से है जहाँ मेगालिथिक परंपराएँ आज भी जीवित सांस्कृतिक प्रथाओं के रूप में समुदायों के दैनिक जीवन से जुड़ी हुई हैं. बैठक में झारखंड की प्रमुख विरासत स्थलों पकरी बरवाडीह (हजारीबाग), जो सूर्य की गति से संरेखित एक विशिष्ट मेगालिथिक परिसर है, मंदर जीवाश्म उद्यान, साहिबगंज, तथा राज्य के विभिन्न जिलों में फैले मोनोलिथ, शैलचित्र और पाषाण स्मारकों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
झारखंड सरकार की दृष्टि विरासत संरक्षण को अनुसंधान, शैक्षणिक साझेदारी, स्थानीय आजीविका, समुदाय-आधारित सांस्कृतिक पर्यटन और आदिवासी ज्ञान प्रणालियों से जोड़ने की है. इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल द्वारा “सेंटिनल्स ऑफ टाइम” शीर्षक से प्रकाशित एक कॉफी टेबल बुक भी प्रस्तुत की गई, जिसमें झारखंड के मेगालिथिक और जीवाश्म परिदृश्यों को शोध-आधारित आलेखों और दृश्य दस्तावेज़ों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, ताकि राज्य की विशिष्ट प्रागैतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके. इस कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार, अध्यक्ष, महिला एवं बाल विकास समिति झारखण्ड विधानसभा कल्पना मुर्मू सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना डाडेल, इंग्लैंड की सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्लॉडिया केन्याटा एवं भारतीय उच्चायोग, ब्रिटिश उप-उच्चायोग (कोलकाता), इंग्लिश हेरीटेज ट्रस्ट, नेशनल ट्रस्ट और नेचुरल इंग्लैंडके प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे.




