जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौता के पहले अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू ने अपने सारे मातहत 10 पदाधिकारी के साथ मीटिंग की. इस मीटिंग में अध्यक्ष ने सभी को जानकारी दी कि वेज रिवीजन समझौता की क्या स्थिति है. उन्होंने बताया कि अब तक प्रेजेंटेशन का दौर चल रहा है, जिसमें कम्पनी की स्थिति से सबको अवगत कराया गया हैं. (नीचे भी पढ़ें)
यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि इस बार भी वेज रिवीजन सात साल का होगा. इस दौरान ऑफिस बेयरर ने कहा कि सात साल का होगा तो पुराना ग्रेड का महंगाई भत्ता (डीए) का सीलिंग को हटा दिया जाये और नया सीरीज के कर्मचारियों को पुराना सीरीज के तर्ज पर डीए तय किया जाये. (नीचे भी पढ़ें)
अगर ऐसा नहीं होता है तो चार साल का वेज रिवीजन समझौता किया जाये. अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू ने बताया कि मैनेजमेंट की ओर से परफॉर्मेंस आधारित प्रमोशन यानी पीएमएस सिस्टम को लागू करने की मंसा जताई गई है. इस सिस्टम को कंपनी के अन्य प्लांट और सब्सिडियरी कंपनी में लागू किया जा चुका है. (नीचे भी पढ़ें)
हालांकि अध्यक्ष ने कहा कि इस सिस्टम को रोकने का पूरा प्रयास होगा. प्रत्येक कर्मचारी पर होने वाले खर्च और मेडिकल के खर्च के बारे में भी मैनेजमेंट ने कहा है कि इसको भी कम करने की जरूरत है और उत्पादकता को बढ़ाने पर बोल दिया जाना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
अध्यक्ष टुन्नू चौधरी ने यह मीटिंग चमरिया गेस्ट हाउस में की, जो तीन घंटे तक चली. महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह के अलावा तमाम पदाधिकारी मौजूद थे. इस मीटिंग में बताया गया कि मैनेजमेंट की ओर से बताया गया है कि कॉस्ट टू कंपनी (सीटीसी) कितना एक कर्मचारी पर पड़ रहा है और पिछले वेज रिवीजन से लेकर अब तक कितना बढ़ोत्तरी वेतन पर हो चुका है. (नीचे भी पढ़ें)
प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने पर फोकस किया गया और 2030 के बाद से होने वाले माइंस की चुनौती को लेकर तैयारी के निमित प्रोडक्टिविटी (उत्पादकता) की जानकारी दी गयी. वहीं, पुराने और नये सिरीज के कर्मचारियों के वेतन बढ़ोत्तरी की स्थिति की जानकारी दी गयी. सारे पदाधिकारियों से सुझाव भी लिया गया. इसमें यह भी बताया गया कि मेडिकल पर प्रति कर्मचारी 1500 रुपये औसतन खर्च हो रहा है.




