कोलकाता : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहीं. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए हैरानी जताई कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री किसी बात को लेकर नाराज हैं, क्योंकि उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री आईं और न ही कोई अन्य मंत्री मौजूद था. मुर्मू ने सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासियों की एक सभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं. इससे पहले राष्ट्रपति दिन में बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईंपुर में एक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. (नीचे भी पढ़ें)

राष्ट्रपति ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ने कहा कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं. मैं भी बंगाल की बेटी हूं. मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या नहीं. खैर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप सब ठीक रहें. उन्होंने आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम के आयोजन स्थल को बिधाननगर से गोसाईंपुर ट्रांसफर किए जाने पर भी सवाल उठाया, जहां कथित तौर पर उपस्थिति कम रही. उन्होंने कहा कि अगर कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होता, तो बेहतर होता. राष्ट्रपति ने कहा कि वहां पर्याप्त जगह है और कई लोग शामिल हो सकते थे, लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी. आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है. (नीचे भी पढ़ें)
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहतीं और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया. मुर्मू को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित होने वाला था. अधिकारियों ने हालांकि सुरक्षा और अन्य व्यवस्था संबंधी कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईंपुर में ट्रांसफर कर दिया.(नीचे भी पढ़ें)
प्रोटोकोल भंग होने से दिखीं नाराज
शनिवार दोपहर जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो वहां केवल कुछ ही लोग मौजूद थे. सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देव ही एकमात्र प्रतिनिधि थे, जो हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उपस्थित थे. प्रोटोकोल के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए आम तौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उपस्थित होता है. कोलकाता में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी अपना धरना जारी रखा.







