जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती 61 वर्षीय कानू चक्रवर्ती की मंगलवार रात उपचार के दौरान मौत हो जाने के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई. मृतक के परिजनों ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया. मृतक कानू चक्रवर्ती ओल्ड सीतारामडेरा के निवासी थे. उनकी छोटी बेटी सिंजा चक्रवर्ती ने बताया कि उनके पिता पिछले चार वर्षों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. पहले निजी अस्पतालों में इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था और वह बालीगुमा स्थित बीपीसीएल में कार्यरत थे. करीब एक माह पूर्व लीवर में पानी भरने की शिकायत बढ़ने पर उनका एमजीएम अस्पताल में इलाज कराया गया था, जिसके बाद तबीयत में सुधार होने पर उन्हें घर भेज दिया गया था. परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया. गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर लिया. उनका इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रहा था. (नीचे भी पढ़ें)
परिवार का आरोप है कि भर्ती के बाद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मरीज की नियमित निगरानी नहीं की. कई बार बुलाने के बावजूद चिकित्सक समय पर वार्ड नहीं पहुंचे, जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. मंगलवार रात करीब 10 बजे कानू चक्रवर्ती ने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और मेडिसिन वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से इलाज में कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने और इस संबंध में लिखित आश्वासन देने की मांग की. (नीचे भी पढ़ें)

सूचना मिलने पर अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे. स्थिति तनावपूर्ण होने पर पीसीआर और एमजीएम थाना पुलिस को सूचना दी गई. रात करीब 11 बजे पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और परिजनों से बातचीत कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया. वहीं, अस्पताल सूत्रों का कहना है कि मरीज की हालत अत्यंत गंभीर थी। चिकित्सकों ने परिजनों को बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने और आईसीयू में भर्ती कराने की सलाह दी थी, लेकिन आर्थिक कारणों से परिजन एमजीएम अस्पताल में ही इलाज कराना चाहते थे. परिजनों का कहना है कि यदि समय पर आईसीयू की सुविधा और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी. देर रात तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था. मामले को लेकर पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है.




