जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शुक्रवार को कथावाचक स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कार्तिक, गणेश की उत्पति, तारकासुर को मोक्ष, राजासुर कथा, दुर्वासा एवं हनुमान अवतार कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए कहा कि आज की कथाएं शिव परिवार की महिमा, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं. गणेश जी माता-पिता की परिक्रमा कर प्रथम पूज्य बने, जबकि कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया. उन्होंने कहा कि शिव जी और पार्वती जी के दो पुत्र कार्तिक और गणेश थे. दोनों ही अपने गुणों में निपुण और एक से बढकर एक थे. जो व्यक्ति कार्तिकेय और गणेश के जन्म की पावन कथा को सुनता या सुनाता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सभी शुभ मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. (नीचे भी पढ़ें)

कथावाचक ने कहा कि शिवजी ने भक्तों की रक्षा के लिए दुर्वासा व हनुमान अवतार लिए. हनुमान जी का अवतार शक्ति, भक्ति और समर्पण का संगम है. उन्होंने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, रावण ने नंदी का अपमान किया था, जिसके बाद नंदी ने शाप दिया था कि रावण का विनाश एक वानर द्वारा होगा, जिसे पूर्ण करने के लिए शिव ने हनुमान-रूप लिया. राजासुर कथा अज्ञान और अहंकार के अंत की कहानी है. (नीचे भी पढ़ें)

राजासुर जैसे असुरों की कथा यह बताती है कि जब अहंकार हद से बढ़ता है, तो भगवान स्वयं उनका अंत करने के लिए अवतार लेते हैं, जैसा कि तारकासुर के वध में दिखा. पाचवें दिन शनिवार को कथावाचक जालन्घर वघ, द्वादश ज्योतिर्लिग वर्णन कथा का प्रसंग सुनाएगें. शुक्रवार को भी मुख्य यजमान पुष्पा देवी-रामाकांत साह और आंचल-मनीष कश्यप थे. सुबह 7 से 10 बजे तक संस्था से जुड़े 11 जोड़ो ने पूजा कराई. रोजाना की तरह आज भी काफी संख्या में भक्तों ने शामिल होकर कथा का आनन्द लिया.







